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तो गर्मी में लगेंगे बिजली के झटके

Mon, 16 Dec 2013 12:51 AM IST
अमर उजाला, नोएडा
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पाली स्थित चार सौ केवी सबस्टेशन की क्षमता बढ़ाने का काम फिलहाल अटक गया है। प्राधिकरण ने ट्रांसफार्मर बदलने का खर्च उठाने से इंकार कर दिया है।
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हालांकि ट्रांसफार्मर को लीज पर देने का विकल्प दिया है, मगर विद्युत निगम के स्थानीय अधिकारी फिलहाल इस पर राजी नहीं हैं। देरी से निर्णय होने पर अगली गर्मी में बिजली राहत को झटका लग सकता है।

जिले में चार सौ केवी का एकमात्र बिजलीघर पाली (दादरी) में बना हुआ है। इसमें 315 एमवीए के तीन ट्रांसफार्मर लगे हैं। इसकी कुल क्षमता 945 एमवीए है।

विद्युत निगम ने इस बिजलीघर में 315 एमवीए ट्रांसफार्मर की जगह पांच सौ एमवीए का नया ट्रांसफार्मर लगाने का प्रस्ताव तैयार किया।

इसका खर्च उठाने पर प्राधिकरण के साथ पहले सहमति भी बन गई थी मगर अब उसने पैसा देने से मना कर दिया है। इस ट्रांसफार्मर को बदलने में करीब 35 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।
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जानकारी के मुताबिक बीते शुक्रवार को प्राधिकरण के चेयरमैन रमा रमण की अध्यक्षता में प्रशासनिक कार्यालय में विद्युत निगम के अधिकारियों के साथ बैठक हुई जिसमें प्राधिकरण ने यह कहते हुए पैसा रिलीज करने से मना कर दिया कि इस चार सौ केवी बिजलीघर को यूपीपीसीएल ने ही बनाया है।

इसे चलाने का जिम्मा भी उसी पर है। प्राधिकरण केपास कोई ऐसा मद नहीं है, जिसमें से इस बिजलीघर के ट्रांसफार्मर के लिए पैसा दिया जा सके। हालांकि प्राधिकरण ने ट्रांसफार्मर लीज पर देने का सुझाव दिया है। उसी के हिसाब से प्रस्ताव देने को कहा है।

अब विद्युत निगम के स्थानीय अधिकारी मुख्यालय को पत्र लिखकर इस बैठक में उठे मुद्दों से अवगत कराएंगे। वहां से निर्देश आने पर ही इस बारे में कोई निर्णय हो सकेगा।

इस बिजलीघर में पांच सौ एमवीए का ट्रांसफार्मर लग जाने से बिजलीघर की कुल क्षमता 945 से बढ़कर 1130 एमवीए हो जाती, जिससे आने वाली गर्मी में नोएडा व ग्रेटर नोएडा को काफी राहत मिल सकती थी।

चार सौ केवी के दो सबस्टेशन भी प्रस्तावित
नोएडा। पाली के अलावा चार सौ केवी के दो नए बिजलीघर प्रस्तावित हैं। इनको खुद प्राधिकरण बनवा रहा है। सेक्टर 123 व 148 में बनने वाले इन दो बिजलीघरों का खर्च करीब 900 करोड़ रुपये प्राधिकरण ही उठाएगा।
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इसे बनाने का जिम्मा उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को दिया जा चुका है। इसकी कागजी प्रक्रिया पूरी की जा रही है। दोनों ही बिजलीघर जीआईएस तकनीक से बन रहे हैं।

इस तकनीक से बिजलीघर को बनाने में कम समय लगने के साथ ही जगह भी कम लगती है। मार्च-अप्रैल से इन दो बिजलीघरों का काम शुरू हो सकता है।
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