कहने को गांव, आबादी 1700, पक्के मकान, पक्की सड़कें, न तो यहां अपराध होता है और न ही लोग नशा करते हैं। कुछ ऐसा है ये शाहजहांपुर से करीब पांच किलोमीटर दूर बसा गांव नियामतपुर।
ये गांव इसलिए भी आदर्श है कि यहां आपसी रंजिश की वजह से लोग आपस में नहीं लड़ते। लगभग पूरी तरह अपराधमुक्त इस इस गांव के किसी शख्स की ओर पिछले 25 साल में पास के थाने में चोरी भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है।
नियामतपुर गांव यूं तो काफी फैला है लेकिन यहां सिर्फ एक ही स्थान पर होली जलती है। पूरे गांव में एक ही जगह होलिका दहन की जाती है। गांव के सभी लोग यहां एकत्र होते हैं और साथ आखर डालते हैं। अगर कोई नहीं पहुंचता है तो लोग उसे घर से बुलाकर लाते हैं। दिन में रंग खेलने के बाद गांव के लोग एक दूसरे को बधाई देते हैं। एकता इस गांव की तरक्की का मूल मंत्र है।
खास बात यह है कि आपसी झगड़े भी गांव में नहीं होते हैं। गांव में ज्यादातर पक्के मकान हैं, सड़कें पक्की हैं। पिछले 25 साल से एक ही परिवार गांव की प्रधानी चला रहा है। गांव के महीपाल सिंह और अर्जुन सिंह कहते हैं नियामतपुर को गांधी के सपने का गांव कहा जाए तो अतिशयोक्ति नहीं होगी। किसी की किसी से रंजिश नहीं है, अधिकांश लोग कामकाजी हैं।
वीरेंद्र पाल यादव बताते हैं कि पचास फीसदी लोग खेती बाड़ी के साथ दूध का कारोबार करते हैं। महिलाएं व पुरुष खेतों में काम करते रहते हैं और घर खुला रहता है। घर में कोई नहीं भी हो तब भी ताला नहीं पड़ता। गांव का कोटेदार समय से उपभोक्ताओं को राशन मुहैया कराता है।
नियामतपुर में अपनी ननिहाल में आकर बसे वीरेंद्र पाल यादव वर्ष 1987 में गांव के निर्विरोध प्रधान बने थे। उन्हीं के प्रयासों से गांव में कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित हुआ जो केंद्र खेतीबाड़ी में किसानों की मदद कर रहा है। गांव में प्राइमरी से लेकर इंटर तक स्कूल है। वीरेंद्र यादव की पत्नी लज्जावती देवी दो बार गांव की प्रधान रहीं और बाद जिला पंचायत की अध्यक्ष निर्वाचित हुईं। पिछले लगातार दो बार से उनकी पुत्रवधू ममता यादव गांव की प्रधान हैं।
आपसी मतभेदों को भूलकर गांव में सभी लोग एक साथ रहते हैं। विकास के कार्यों में सभी लोगों का सहयोग रहता है। त्योहारसभी लोग मिलकर मनाते हैं। -ममता यादव, ग्राम प्रधान नियामतपुर।