फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

KGMU: दुआ कीजिए कि बीमार न पड़े आपका नौनिहाल

Mon, 01 Jul 2013 11:45 AM IST
लखनऊ/ इंटरनेट डेस्क
विज्ञापन
विज्ञापन
नवजात मरीजों के प्रति अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता का एक नमूना है किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी का बाल रोग विभाग। एक तरफ नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट (एनआईसीयू) की कम बेड क्षमता और दूसरी ओर स्टाफ की कमी के कारण नवजातों का जीवन बचाना संभव नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन


मशीनें तो हैं लेकिन चलाएगा कौन?
चिकित्सकों की कमी के चलते भी दिक्कत पैदा हो रही है। जहां जीवन रक्षक उपकरण उपलब्ध हैं वहां स्टाफ की कमी के चलते बच्चे बिना इलाज लौटाए जा रहे हैं और बीमारी जानलेवा साबित हो रही है। इसके बावजूद चिकित्सकों और नर्सों की कमी से जूझ रहे बाल रोग विभाग के लिए केजीएमयू प्रशासन ने कोई पहल नहीं की।

गौरतलब है कि केजीएमयू का बाल रोग विभाग दो जगह नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) चलाता है। एक बाल रोग विभाग में और दूसरी क्वीन मेरी अस्पताल में नवजात शिशु चिकित्सा इकाई है। बाल रोग विभाग में 16 बेड इंटंेसिव केयर और 20 स्पेशल केयर के बेड हैं। जबकि क्वीन मेरी अस्पताल में 12 स्पेशल केयर बेड हैं। ये सभी बेड लगभग हर समय फुल ही रहते हैं।
विज्ञापन


दो साल तक पड़ी रह गई रकम
विभागीय सूत्रों के अनुसार एनआईसीयू को अपग्रेड करने के लिए 18 फरवरी 2008 को दो करोड़ रुपये जारी किए गए थे। इससे पोर्टेबल एक्स-रे मशीन, हाई फ्रीक्वेंसी, वेंटिलेटर, नियोनेटल, नियोनेटल वेंटिलेटर, सीपेप, ओपन केयर सिस्टम, इन्फयूजन, पंप,मल्टी पैरा मॉनीटर, फाइबर, ऑप्टिक फोटोथेरेपी यूनिट व पल्स ऑक्सीमीटर आदि की खरीद होनी थी।

खरीद की सुस्त रफ्तार के चलते ये राशि दो साल तो खर्च ही हो पाई। फरवरी 2010 में किसी खरीद प्रक्रिया पूरी हुई लेकिन एनआईसीयू में बेड की क्षमता नहीं बढ़ पाई।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें