भाजपा नरेंद्र मोदी को चुनाव अभियान समिति की कमान सौंपने के साथ ही उन्हें यूपी से लोकसभा में भेजने की तैयारी में भी जुट गई है।
मोदी के सिपहसलार रहे अमित शाह यूपी का प्रभार संभालने के बाद पार्टी के स्थानीय क्षत्रपों के साथ लगातार बैठकें कर रहे हैं।
आरएसएस और भाजपा के कई बड़े नेता चाहते हैं कि मोदी वाराणसी या लखनऊ जैसी सुरक्षित सीट से चुनाव लड़ें लेकिन डॉ. मुरली मनोहर जोशी के वाराणसी से चुनाव लड़ने की घोषणा कर देने से पार्टी पसोपेश में हैं।
पार्टी चाहती है कि मुरली मनोहर जोशी खुद ही मोदी के लिए वाराणसी सीट छोड़ दें। उन्हें मनाने के लिए संघ के बड़े नेताओं को लगाया गया है।
संघ के एक वरिष्ठ कार्यकर्ता की मानें तो पिछले दिनों लोकसभा चुनाव को लेकर एक सर्वेक्षण कराया गया था। उसकी रिपोर्ट चौंकाने वाली है।
रिपोर्ट के अनुसार जोशी के लिए इस सीट पर दोबारा दावेदारी करना खतरे से खाली नहीं है। ऐसे में जोशी के लिए पार्टी लखनऊ, कानपुर अथवा मध्य प्रदेश की रीवा सीट को विकल्प के रूप में देख रही है।
वहीं, अमित शाह की 26 जून को जेल भरो आंदोलन के तहत वाराणसी में गिरफ्तारी देने की घोषणा के भी राजनीतिक निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। शाह यहां पार्टी के स्थानीय नेताओं से मोदी की दावेदारी पर चर्चा कर उनकी राय भी जानेंगे।
भाजपा का मानना है कि मोदी को वाराणसी से चुनाव लड़ाने पर कई फायदे हैं।
मोदी की दावेदारी से जहां ज्ञानवापी मुक्ति आंदोलन परवान चढ़ेगा, वहीं इससे प्रदेश में हिंदुत्व की लहर भी पैदा की जा सकती है। जिससे पूर्वांचल में पार्टी कई सीटों पर विजय हासिल कर सकती है।