कांधला और गंगेरू के शरणार्थी शिविरों में अपना दर्द भूल खुशी के आलम के बीच लोग पांच बेटियों के निकाह की तैयारियों में काफी मशगूल थे।
गुरुवार को शिविरों में दूल्हे राजा परिवार संग बारात लेकर पहुंचे, तो उनका लोगों ने इस्तकबाल किया। निकाह संपन्न होने के बाद दुल्हनों की विदाई के समय आंखें नम हो गईं।
सैकड़ों लोगों ने आशीर्वाद स्वरूप गुनगुनाया कि बाबुल की दुआएं लेती जा, जा तुझको सुखी संसार मिले। इसके बाद दुल्हनें अपने शौहर संग विदा हो गईं।
बागपत के किरठल निवासी जैनुद्दीन की बेटी जमीला का निकाह यहां के ही टीकरी निवासी आस मोहम्मद के साथ पहले ही तय हुई थी। 16 सितंबर को दोनों का निकाह होना था।
परिजनों ने शादी का शानदार इंतजाम भी किया था। इस बीच हिंसा होने के कारण परिवार के सदस्य पलायन कर कस्बे के ईदगाह में शरणार्थी शिविर में ठहर गए।
दोनों परिवारों ने सलाह करके बृहस्पतिवार को निकाह तय किया। दूल्हा और उनके परिजन शिविर में पहुंचे और दोनों का निकाह करा दिया।
बागपत जिले के ही किरठल निवासी वकीला की बेटी भूरी की शादी भी 16 सितंबर को शामली के नाजिम से होनी थी। माहौल खराब होने के कारण ही परिवार ईदगाह के शरणार्थी शिविर में आ गया और निकाह टल गया।
दोनों परिवारों की रजामंदी से दूल्हे पक्ष के 10-12 लोग कैंप में पहुंचे और सादगी भरे माहौल में दोनों का निकाह कराया। इसी तरह गंगेरू के मदरसे में ठहरे बदरखाह निवासी हकीमद्दीन की दो बेटियों का निकाह भी कराया गया।
इनका निकाह 11 सितंबर को झिंझाना क्षेत्र में होना था, लेकिन हिंसा के कारण निकाह टल गया था। इसके अलावा बागपत के मुस्तकीम निवासी रठौड़ा की बेटी शादी भी शामली क्षेत्र से आए दूल्हे से हुई।
दोनों ही शरणार्थी शिविरों में बेटियों के निकाह पर माहौल काफी खुशनुमा था। यहां ठहरे सैकड़ों शरणार्थियों ने दंपति को आशीर्वाद देकर हंसी खुशी विदा किया।