ढाई साल पहले शहर में भड़के दंगे के दौरान उपद्रवियों के हमले में घायल हुए रहमतनगर निवासी मेहर आलम ने मंगलवार को दम तोड़ दिया। हमले के बाद से ही वह लगातार कोमा में था। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया।
दोपहर बाद गमगीन माहौल में उसके शव को दफनाया गया। सिटी मजिस्ट्रेट और सीओ सिटी ने भी मेहर आलम के घर पहुंचकर जानकारी ली। परिजनों ने अधिकारियों से आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
जिले में ढाई साल पहले कवाल कांड के बाद दंगा भड़का था। सात सितंबर 2013 को कवाल कांड को लेकर नंगला मंदौड़ में महापंचायत हुई थी। महापंचायत के खत्म होने पर शाम होते-होते जिले में मीरापुर, पुरबालियान, जौली गंगनहर पटरी, मुझेड़ा में पंचायत से लौटते लोगों पर जानलेवा हमले शुरू हो गए थे, जिससे जिले और शहर में दंगा भड़क गया था।
इसी शाम शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला रहमतनगर गली नंबर चार निवासी श्रमिक मेहर आलम पुत्र रहमत इलाही अपने भाई जबरे आलम के साथ रामपुरी मोहल्ले के पास रंगाई-पुताई का काम कर घर लौट रहा था। रुड़की रोड पर पेट्रोल पंप के पास उपद्रवियों की भीड़ ने अचानक उसे घेरकर उस पर हमला बोल दिया। सिर में गंभीर चोट के कारण वह अचेत होकर गिर गया।
हमलावर उसे मृत समझ कर फरार हो गए थे, जबकि उसके भाई जबरे आलम ने किसी प्रकार से भाग कर अपनी जान बचाई थी। पुलिस ने घायल को जिला चिकित्सालय भर्ती कराया। गंभीर अवस्था के उसे मेरठ मेडिकल के लिए रेफर कर दिया था। उसके छोटे भाई शाह आलम की ओर से शहर कोतवाली में 15-16 अज्ञात हमलावरों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
सिर में गंभीर चोटों के कारण वह तभी से कोमा में था। कुछ महीनों के उपचार के बाद जब उसकी बेहोशी नहीं टूटी तो डॉक्टरों ने उसे घर भेज दिया था। कोमा में ही ढाई साल से मेहर आलम जिंदगी के लिए मौत से संघर्ष कर रहा था।
मंगलवार सुबह उसने दम तोड़ दिया। दंगे में घायल की मौत की खबर पाकर सिटी मजिस्ट्रेट राजेंद्र सिंह ने सीओ सिटी डॉ. तेजवीर सिंह और शहर कोतवाल चमन सिंह चावड़ा के साथ रहमतनगर मृतक के घर पहुंचकर परिजनों से जानकारी ली।
परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। परिजनों ने अधिकारियों से शासन, प्रशासन स्तर से आर्थिक मदद की गुहार लगाई। जिस पर अधिकारियों ने यथा संभव मदद का आश्वासन दिया। दुपहर बाद गमगीन माहौल में शव को दफनाया गया।