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पंजाब से अपने घर बिहार जाने को श्रमिकों ने साइकिल खरीदी

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जानसठ में पानीपत खटीमा राजमार्ग से साइकिल पर गुजरते मजदूर। - फोटो : KHATAULI
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जानसठ (मुजफ्फरनगर)। पंजाब में मजदूरी करने वाले बिहार के श्रमिकों को उनके घर छोड़ने के लिए कोई मदद नहीं मिली। वहां खाना भी नहीं मिला, श्रमिक भूखे तड़पने लगे तो, उन्होंने बिहार में अपने परिजनों को फोन करके बैंक खातों में रुपये डलवाए। एटीएम से रुपये निकाल करके सबसे पहले दो-दो हजार रुपयों में घर जाने को पुरानी साइकिलें खरीदीं। भूख मिटाने को गुड़ का चूरा व चने खरीदे। फिर साइकिलों से अपने घर की ओर निकल पड़े।
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बिहार के जिला बेसिया के गांव चंपारान के रहने वाले एक दर्जन श्रमिक 14 मार्च को पंजाब में मजदूरी करने पहुंचे। श्रमिक सुमित पंडित, कविंद्र राहवा, कनोज, करम पंडित, रामसिंह पाल आदि ने बताया कि दस दिन ही मजदूरी की थी, 24 मार्च को देश में लॉकडाउन लागू हो गया। वे पंजाब में ही फंस गए। दस दिन मजदूरी के जो पैसे मिलते थे, वे भी कुछ दिन में खर्च हो गए। पंजाब सरकार की ओर से भी उनको भोजन नहीं दिया गया। कुछ लोगों ने उनकी मदद की और कुछ दिन भोजन खिलाया था। उत्तर प्रदेश सरकार ने मजदूरों को उनके घर भिजवाने की घोषणा की थी, लेकिन उन्हें कोई मदद नहीं मिली। पिछले पंद्रह दिन से तो वे भूखे प्यासे थे। मजबूरन उन्होंने अपने घर बिहार में परिजनों को फोन किया और उनके खातों में रुपये भिजवाने को कहा। परिजनों ने इन श्रमिकों के खातों में रुपये डलवाए। पहले दो-दो हजार रुपयों में पुरानी साइकिलें खरीदीं। श्रमिकों ने बताया कि वे 29 अप्रैल को पंजाब से साइकिल पर अपने घर के लिए चले। खाने के लिए उन्होंने गुड़ का चूरा व चने खरीदे थे। वे गुड़ का चूरा व चने खाकर ही चल रहे हैं। शुक्रवार को साइकिल पर ये श्रमिक कस्बे में पहुंचे। कस्बे में हाजी अब्दुल सलाम ने इन श्रमिकों को दवाइयां दिलवाईं और चने व पेठे की मिठाई खाने को दी। इसके बाद श्रमिक साइकिल से अपने गंतव्य की ओर निकल गए।
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