केंद्र सरकार के शहरी विकास मंत्रालय ने नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर को अमृत योजना में शामिल कर लिया है। इस योजना में शहर के लोगों को अब शुद्ध जल उपलब्ध होगा। वाटर टेस्टिंग के लिए लैब बनेगी। घर-घर जाकर पानी की चेकिंग के लिए मोबाइल लैब की व्यवस्था होगी। प्रत्येक घर में पानी का मीटर लगाया जाएगा।
अमृत योजना में नगर पालिका के लिए केंद्र सरकार ने 22 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। साढ़े चार करोड़ पहली किश्त के रूप में पालिका को प्राप्त हो गया है। अमृत योजना का उद्देश्य आम जनता को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है। योजना में नगर में पानी की टेस्टिंग के लिए एक लैब बनाई जाएगी। इसके साथ ही शिकायत पर पानी की गुणवत्ता चेक करने के लिए मोबाइल लैब भी शहर को दी जाएगी। वाटर सप्लाई के कार्य में पालिका को अब से पहले घाटा होता रहा है। इसे दूर करने के लिए इस योजना में सभी घरों में पानी के मीटर लगाए जाएंगे, जो लोग बिना कनेक्शन लिए अवैध तरीके से पानी का प्रयोग कर रहे हैं, उनके कनेक्शन रेगुलाइज किए जाएंगे।
अमृत योजना में नगर पालिका क्षेत्र में 40 साल से बंद पड़े सीवर फिर से चालू किए जा रहे हैं। एडजेस्टिंग लाइन, मेनहॉल ठीक किए जाएंगे। सीवर का मेंटीनेंस होगा। टॉयलेट के कनेक्शन सीवर से जोड़े जाएंगे। इसके लिए केंद्र सरकार ने 32 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं, इसमें से साढ़े पांच करोड़ पहली किश्त के रूप में मिल चुके हैं।
ईको फ्रेंडली पार्क बनेंगे
मुजफ्फरनगर। अमृत योजना में शहर में ईको फ्रेंडली पार्क बनाए जा रहे हैं। इस योजना में 2015-16 में कमला नेहरू वाटिका कंपनी बाग का चयन हुआ। इसके लिए एक करोड़ दो लाख रुपये स्वीकृत हुए हैं। 2016-17 में छह पार्क चुने गए हैं। इसमें झांसी रानी पार्क, अंबा विहार, गांधी वाटिका, पटेलनगर पार्क, सद्भावना पार्क, द्वारिकापुरी पार्क शामिल हैं।
तेजी से हो रहा है कार्य
मुजफ्फरनगर। ईओ अजीत सिंह का कहना है कि अमृत योजना से आम जनता के साथ पालिका को भी लाभ होगा। वाटर सप्लाई में रेवेन्यू लॉस समाप्त होगा। जनता को शुद्ध पानी मिलेगा। 40 साल से बंद पड़े सीवर चालू होंगे। पार्कों में आवश्यकता के अनुसार बच्चों, बूढ़ों, महिलाओं को सुविधा दी जाएगी। जल निगम को कार्यदायी संस्था बनाया गया है। उसने अपना काम शुरू कर दिया है।