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वन्य जीव हस्तिनापुर सेंचुरी की गोचर की भूमि पर कब्जा

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गंगा खादर में शिकार के बाद पड़े बारहसिंघा के अवशेष। - फोटो : KHATAULI
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मोरना (मुजफ्फरनगर)। वन्य जीव हस्तिनापुर सेंचुरी में भूमाफिया ने गंगा खादर में गोचर की हजारों बीघा भूमि की जुताई कर कब्जा कर लिया है। वहीं, रात में भूमाफिया वन्य जीवों का शिकार कर उनके अवशेषों की तस्करी भी करते हैं। शिकायत पर एसडीएम जानसठ द्वारा वन विभाग, सिंचाई विभाग, राजस्व विभाग आदि टीम के साथ मौके पर जाकर कब्जा की गई भूमि का निरीक्षण कर आला अधिकारियों को अवगत कराया। गोवंश पालक और ग्रामीणों ने अधिकारियों पर खानापूर्ति करने का आरोप लगाया।
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मुजफ्फरनगर के शुकतीर्थ बिहारगढ़ गंगा खादर के नीला जलालपुर बेहड़ा, अखाखेड़ी, नरुरपुर, धारीवाला, रणजीतपुर, शिवपुरी, ब्रहमपुरी आदि गैर आबाद गांव के रकबा तहसील जानसठ के अंतर्गत आता है। जिला बिजनौर के गांव रावली, नुरोलपुर आदि का रकबा बिजनौर तहसील में आता है, जिस पर सैकड़ों वर्षों से दोनों जिलों के गोवंश पालक गायों और गोवंशों को वन्य जीव अभ्यारण्य क्षेत्र के जंगल में चराते चले आ रहे हैं। परमधाम अनुयायियों और गोवंश पालकों ने डीएम सेल्वा कुमारी जे और एसडीएम जानसठ अनुज मलिक को गंगा खादर की भूमि पर गोचर की भूमि की जुताई कर अवैध रूप से कब्जा किए जाने की शिकायत की थी। डीएम के आदेश पर एसडीएम जानसठ के दिशा निर्देशन में वन विभाग के एसडीओ पीएस मथुरिया, रेंजर सिंहराज सिंह पुंडीर, वन दरोगा शबी हेदर, सतेंद्र कुमार, प्रवेश, राजस्व विभाग से कानूनगो ऋषिपाल राठी, लेखपाल पंकज कुमार, मनोज, अंकित सर्वे टीम लेखपाल अमित धामा, सिंचाई विभाग बिजनौर से एसडीओ पंकज कश्यप, लेखपाल संजय कुमार आदि की टीम ने गंगा खादर गोचर की भूमि का निरीक्षण किया, जिसमें भूमाफिया के द्वारा जोती गई हजारों बीघा जमीन को गोवंश पालकों ने दिखाते हुए अवैध कब्जा हटवाने की गुहार लगाई। इस दौरान जिला बिजनौर और मुजफ्फरनगर की टीमों के बीच सीमा विवाद बना रहा।
जांच पड़ताल करने की खानापूर्ति करती हैं टीमें
गोवंश पालकों रामकेश, जगपाल, बीरसिंह पहलवान, राजपाल, सतपाल, रमेश, हरिया, अरिवंद, राजेंद्र, मदन, बबलू, सोनू, राजू, शहरी, दीपु, जीतू आदि ने बताया कि गंगा खादर में जिला बिजनौर और मुजफ्फरनगर के भूमाफिया अपने ट्रैक्टर व अन्य साधनों से गोचर की भूमि को जोतकर गेहूं, सरसों आदि की फसल बोने के लिए जमीन पर कब्जा जमा लेते हैं, जिनकी शिकायत वर्षों से शासन प्रशासन को गोवंश पालक करते चले आ रहे हैं। टीमें मौके पर आकर जांच पड़ताल करने की खानापूर्ति कर कार्रवाई की बात तो कहती हैं, लेकिन आज तक किसी भूमाफिया के विरुद्ध ठोस कार्रवाई नहीं हो पाई। गोचर भूमि की जुताई होने से गंगा खादर में गोवंशों को चराने की जगह नहीं बच पाई है।
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रात में वन जीवों का करते हैं शिकार
भूमि पर कब्जा करने के साथ-साथ भूमाफिया रात के अंधेरे में ट्रैक्टर पर सवार होकर वन्य जीवों का शिकार करते हैं। गंगा खादर क्षेत्र में बारहसिंहा व अन्य जानवरों के अवशेष जगह-जगह बिखरे पड़े हैं। ग्रामीणों ने बताया कि रात के अंधेरे में गंगापार से वाहनों पर लगी बड़ी-बड़ी लाइटों की तेज रोशनी वन्य जीवों का होने वाले शिकार की कहानी स्वयं बयां कर देते हैं। शिकारी वन्य जीवों को दौड़ाकर गोली का शिकार बनाकर मांस और अन्य जीवों की तस्करी करके लाखों रुपये कमाकर माला-माल हो गए हैं।
अधिकारी आरोप प्रत्यारोप लगाकर आपस में उलझे
बिजनौर एसडीओ पंकज कश्यप ने बताया कि यह भूमि सिंचाई विभाग की है। इसकी देखभाल की जिम्मेदारी वन विभाग की है। जिस पर वन विभाग अधिकारी पीएस मथुरिया ने अपनी भूमि न होने की बात कर इस मामले से हाथ खड़े कर दिए। इस दौरान दोनों विभाग एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाते रहे।

गंगा खादर में चारा नहीं मिलने से भूखी बैठी गाय व गोवंश।- फोटो : KHATAULI

-गंगा खादर में भूमि के बारे में गोवंश पालकों से जानकारी लेते अधिकारी।- फोटो : KHATAULI

गंगा खादर में कब्जाई भूमि को देखते गोवंश पालक।- फोटो : KHATAULI

गंगा खादर में भूमि के बारे में गोवंश पालकों से जानकारी लेते अधिकारी।- फोटो : KHATAULI

गंगा खादर में नक्शा लेकर भूमि चिन्हित करने को आंकलन करते अधिकारी।- फोटो : KHATAULI

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