मुजफ्फरनगर। सहारनपुर मंडल में मजबूत विपक्ष भाजपा के लिए चुनौती बनकर खड़ा हो सकता है। सरकार की ढाल बनते रहे पूर्व मंत्री सुरेश राणा को इस बार कैबिनेट में शामिल नहीं किया गया, जबकि डॉ. धर्म सिंह सैनी विपक्ष के पाले में खड़े हैं। शामली और मुजफ्फरनगर में भाजपा के पास सिर्फ दो विधायक हैं, जिनमें सदर विधायक कपिल देव अग्रवाल को राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार बनाया गया है। सदन और सदन के बाहर मजबूत विपक्ष का सामना करना आसान नहीं होगा।
पूर्व गन्ना मंत्री सुरेश राणा 2012 में विपक्ष में रहने के दौरान सदन और सदन से बाहर भाजपा का पक्ष मजबूती से रखते रहे थे। 2017 में जीते तो गन्ना मंत्री बनें। सदन के अलावा जनसभाओं और मीडिया के सामने राणा गन्ने के मुद्दे पर सरकार की मजबूत पैरवी करते दिखते थे। यही वजह है कि वह सीएम योगी आदित्यनाथ के करीबियों में शामिल हैं, लेकिन हार की वजह से इस बार उन्हें मंत्री मंडल में शामिल नहीं किया गया है।
यही नहीं शामली की तीनों सीटें भाजपा हार गई, जिस वजह से जिले को सरकार में प्रतिनिधित्व भी नहीं मिला। सहारनपुर में डॉ. धर्म सिंह सैनी के विकल्प के तौर पर जसवंत सैनी को जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन वह भी राज्यमंत्री बनाए गए हैं। ऐसे में भाजपा के सामने सहारनपुर मंडल में सदन के बाहर और भीतर विपक्ष चुनौतियां खड़ी कर सकता है। गठबंधन के पास नौ सीटें है, जबकि भाजपा सिर्फ सात सीटों पर काबिज है।
विपक्ष के पास अनुभवी विधायक
सदन में इस बार विपक्ष के पास जिले से अनुभवी विधायक है। बुढ़ाना से राजपाल बालियान, पुरकाजी से अनिल कुमार और चरथावल से पंकज मलिक तीसरी बार चुने गए हैं। मीरापुर से चंदन चौहान, शामली से प्रसन्न चौधरी और थानाभवन से अशरफ अली पहली बार जीते हैं, लेकिन सियासी अनुभव है। कैराना से नाहिद हसन कई बार जीत चुके हैं। सहारनपुर में धर्म सिंह सैनी पुराने अनुभवी राजनीतिज्ञ हैं।