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...बोझ बन जाएं तो अपने भी गिरा देते हैं

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मुशायरे में शायर ताबिश मेहंदी को सम्मानित करते जहान-ए-अदब एकेडमी के पदाधिकारी - फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। अदबी व समाजी संस्था जहान-ए-अदब एकेडमी की और से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त शायर डा. ताबिश मेहंदी ओर प्रसिद्ध सूफी गायक जीशान फैजान साबरी के सम्मान में मुशायरे का आयोजन किया गया। जिसमें शायरों ने उम्दा कलाम पेश किए।
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शुक्रवार रात मोहल्ला किला पर हुए मुशायरे का उद्घाटन एकेडमी चेयरमैन तनवीर अजमल ने फीता काटकर व दिल्ली के सूफी गायक जीशान फैजान साबरी ने शमा रोशन कर किया। गायक फैजान साबरी ने कुछ यूं कहा ... मुझको गिरते हुए पत्तों ने ये समझाया है, बोझ बन जाए तो अपने भी गिरा देते है। डा. ताबिश मेहंदी ने पढ़ा ...क्या खबर कौन कब लूट ले राह में, काफिले से अलग मत रहा कीजिए। शमीम किरतपुरी ने कहा... अपने ही पांव पे खुद हमने कुल्हाड़ी मारी, राज की बात पड़ोसी को बता दी हमने। तनवीर अजमल ने कहा ...मैं तन्हा होके भी तन्हा नहीं हुआ अजमल, वो साया बनके मेरे साथ चलता रहता है। अदनान अनवर ने कहा... सुनते हैं उनके दर पे संवरती हैं किस्मतें, आए हैं हम भी अपना मुकद्दर लिए हुए। जीशान साबरी ने कहा ...तू ही बता ये प्यार है या बेवफाई है, बरसों के बाद तुझको मेरी याद आई है। डा. काशिफ अख्तर ने पढ़ा ...कहां जाते हो यूं पहलू बदल के, अभी कुछ शेर बाकी हैं गजल सुनाकर देर रात तक श्रोताओं की वाहवाही लूटी। इनके अलावा दिलशाद खुशतर, नफीस अहमद, सुहैल अकमल, नवाब अख्तर, नौशाद साबरी ने भी अपना कलाम पेश किया। कार्यक्रम में डा. ताबिश और फैजान जीशान साबरी को सम्मानित किया गया। अध्यक्षता ताबिश मेहंदी व संचालन फैसल उस्मानी ने किया। इस मौके पर फिरोज साबरी, आजम साबरी, मो. यूसुफ आदि मौजूद रहे।
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