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Muzaffarnagar News: लक्ष्य घटते ही बढ़ गई गेहूं की खरीद

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मुजफ्फरनगर। खरीदारी के बीच खाद्य एवं विपणन विभाग ने गेहूं क्रय के लक्ष्य में बदलाव कर दिया है। शुरूआत में पिछले सीजन को आधार मानते हुए 25500 मीट्रिक टन की खरीद का लक्ष्य दिया गया था लेकिन अब इस बदलकर 14500 मीट्रिक टन कर दिया गया है। लक्ष्य घटते ही खरीद का प्रतिशत खुद ही बढ़ गया है। अब करीब 51 प्रतिशत खरीद हो गई और प्रदेश में जिला 12वें स्थान पर है।
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पहले प्रदेश का लक्ष्य 30 लाख मीट्रिक टन था, जिसे घटाकर अब 25 लाख कर दिया गया है। इस बार कम पैदावार, पिछले सालों में लक्ष्य पूरा नहीं होने और गोदामों में पर्याप्त गेहूं उपलब्ध होने के कारण यह बदलाव किया गया है।
मुजफ्फरनगर में चार हजार से अधिक किसान अब तक पंजीकरण कराकर अपना गेहूं सरकारी केंद्रों पर बेच चुके हैं। भले ही लक्ष्य आधा पूरा हो गया हो लेकिन आने वाले दिनों में सरकारी केंद्रों पर खरीद का संकट खड़ा हो सकता है।
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इसकी वजह यह है कि सरकारी क्रय केंद्रों पर भाव प्रति क्विंटल 2585 रुपये दिया जा रहा है। दो दिन में नवीन मंडी में आढ़तियों ने दाम बढ़ाना शुरू कर दिया है। वर्तमान में 26 सौ रुपये प्रति क्विंटल दिया जा रहा है। एक सप्ताह में प्राइसवार शुरू होने से सरकारी क्रय केंद्रों पर गेहूं पहुंचना आसान नहीं होगा।
कुछ किसान अभी बाजार की स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। गन्ने की बुआई करने के बाद बिक्री का सिलसिला तेज होगा, उसी समय प्राइसवार छिड़ सकती है। ऐसे में लक्ष्य भले ही कम हो गया हो लेकिन इसे पूरा करना भी आसान नहीं रहेगा।
लक्ष्य के मुकाबले इस तरह हुई खरीद
जिला लक्ष्य खरीद
मुजफ्फरनगर 14500 7465.41
सहारनपुर 60000 20540.09
शामली 25000 8444.27
बिजनौर 18500 6075.79
मेरठ 7000 2840.35
बागपत 5000 1793.15

नोट- लक्ष्य खरीद का आंकड़ा मीट्रिक टन में (05 मई तक)


लक्ष्य में किया गया बदलाव : श्रीवास्तव
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी प्रवीण प्रकाश श्रीवास्तव बताते हैं कि लक्ष्य कम कर दिया गया है। शुरूआत में खरीद पिछले साल के लक्ष्य के हिसाब से ही हुई थी लेकिन अब बदलाव हो गया है। फिलहाल सभी 50 केंद्र सक्रिय हैं।

किस विभाग के कितने बनाए गए केंद्र

खाद्य विभाग विपणना शाखा - 11
भारतीय खाद्य निगम- 02
उत्तर प्रदेश सहकारी संघ- 21
उत्तर प्रदेश कॉपरेटिव यूनियन-14
यूपी कृषि उत्पादन मंडी- 02


ये बोले किसान
नवीन मंडी में आए भोपा के किसान सतवीर सिंह कहते हैं कि सरकारी केंद्रों पर भी भुगतान की तुरंत व्यवस्था होनी चाहिए। पंजीकरण के चक्कर में किसान का समय बर्बाद होता है। करहेड़ा के अनिल कुमार ने कहा कि इस बार उत्पादन कम हुआ है। किसानों को भी गेहूं से नुकसान उठाना पड़ा है।
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