पेयजल समिति की बैठक में ग्राम प्रधानों ने एक स्वर में कहा कि स्वच्छ पेयजल के नाम पर अरबों बर्बाद करने से अच्छा है, उनके गांवों से योजना वापस ले जी जाए। टंकियां बने दस साल गुजरने के बाद भी ग्रामीणों को पानी मुहैया नहीं हो रहा है।
एक-दो गांवों को छोड़कर सभी गांवों में टंकी में घटिया पाइप लगाने और उनके जगह-जगह लीकेज होने की समस्या से ग्राम प्रधान तंग हैं। प्रधानों ने जल निगम पर टंकियों के निर्माण में भारी घोटाले के आरोप लगाए।
जिला पंचायत सभागार में अध्यक्ष आंचल तोमर की अध्यक्षता में सीडीओ अंकित अग्रवाल ने ग्राम प्रधानों, पूर्व प्रधानों और ग्राम पंचायत सचिवों की बैठक ली। जिसमें जल निगम पर भ्रष्टाचार के तमाम आरोप लगे। दो वर्ष पूर्व हैंडओवर हो चुकी 45 टंकियों में से केवल तीन गांवों में ही स्थिति सही मिली।
बाकी सभी गांवों में घटिया पाइप का इस्तेमाल होने और उनमें जगह-जगह लीकेज होने की समस्या सामने आई। खुड्डा और सठेड़ी के प्रधान ने तो यहां तक कह दिया कि स्वच्छ पानी देने के नाम पर सरकार का अरबों रुपया बर्बाद किया जा रहा है। पैसा खर्च हो रहा है, बावजूद इसके लोगों को पानी नहीं मिल रहा है, ऐसे में गांवों में योजना बंद कर दी जाए, इससे सरकार का पैसा तो बच जाएगा।
तावली के ग्राम प्रधान ने कहा कि पिछली बैठक में जल निगम के एक्सईएन केबी जैन ने 15 दिन में व्यवस्था सुधारने का आश्वासन दिया था, लेकिन हुआ कुछ नहीं। साल्हाखेड़ी के ग्राम प्रधान ने कहा कि उनके गांव में टंकी की लाइन टूटने से पानी लोगों तक नहीं पहुंच रहा, जो हैंडपंप लगे हैं वह भी ऊपर ही लगा दिए, सब सूख गए। लाल पानी आ रहा है।
10 गांवों के प्रधानों ने यह बताया कि उनके गांवों में कुछ माह टंकी चलने के बाद पाइप फट गए और टंकी बंद पड़ी है । वे लोग जल निगम के दफ्तर के चक्कर काटकर थक चुके हैं। प्रधानों का गुस्सा इस बात को लेकर था कि एक-एक योजना पर 80 लाख से लेकर ढाई करोड़ तक का खर्च आया है। जिले में अरबों रुपये स्वच्छ जल के लिए खर्च हो रहे हैं।
सरकारी भ्रष्टाचार के चलते जब योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है तो इन्हें बंद कर दिया जाए। जिला पंचायत अध्यक्ष आंचल तोमर ने प्रधानों को विश्वास दिलाया कि पेयजल में करप्शन दूर कराया जाएगा। सीडीओ अंकित अग्रवाल ने सभी प्रधानों को विश्वास दिलाया कि उनकी सभी शिकायतों की जांच होगी। दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। संचालन सरदार बलजीत सिंह ने किया। बैठक में जलनिगम के अधिकारी, डीपीआरओ हरिकेश बहादुर आदि मौजूद रहे।
विकलांग टंकियों का हम क्या करें
बैठक में बिलासपुर, शेरनगर, सुजडू और धंधेड़ा के पंचायत सचिव ने सीडीओ के सामने कहा कि उनके यहां छह माह पूर्व टंकी हैंडओवर हुई है। चारों गांवों में पाइप फटने के कारण जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। ऐसी विकलांग टंकियों में हम क्या करें।
लखनऊ तक है पाइप घोटाला
गांवों में जिस पाइप की लाईन बिछाई जा रही है, वह मानकों के अनुरूप नहीं है। जल निगम का मंत्रालय प्रदेश के तेजतर्रार कहे जाने वाले मंत्री आजम खां पर है। उन्हीं के विभाग में पाईप घोटाला होने से सवाल खड़े हो रहे हैं। पाइप के खरीदने के पीछे की क्या कहानी है, यह स्पष्ट नहीं है। जांच के बाद ही सच सामने आ पाएगा। एक्सईएन केबी जैन ने बताया कि पाईप लखनऊ से विभाग मुहैया करा रहा है।
जेल जाएंगे ठेकेदार
सीडीओ अंकित अग्रवाल ने कहा कि पानी की टंकियों के निर्माण में जिस तरह भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आ रही हैं। इनकी जांच वह खुद करेंगे या सक्षम अधिकारियों से कराएंगे। दोषी ठेेकेदार काली सूची में तो डाले ही जाएंगे, जेल भी भेजा जाएगा। गलत रिपोर्ट प्रस्तुत करने वाले अधिकारी भी नपेंगे।