उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल मोती लाल वोरा को आशीर्वाद देते वीतराग स्वामी कल्याणदेव। (फाइल
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शिक्षा ऋषि के अभियान में सहयोगी बने थे वोरा
मुजफ्फरनगर। प्रदेश के राज्यपाल रह चुके मोतीलाल वोरा सूबे के ग्रामीण अंचल में वीतराग स्वामी कल्याणदेव द्वारा शिक्षण संस्था खोलने के अभियान में सहयोगी बने थे। शिक्षा ऋषि के आमंत्रण को वे टाल नहीं पाते थे। उनकी अनेक यादें जिले से जुड़ी है।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मोतीलाल वोरा (93) का निधन हो गया। वर्ष 1993 से वे प्रदेश के तीन साल तक राज्यपाल रहे। इस दौरान वे वीतराग स्वामी कल्याणदेव के निष्काम सेवाभावी जीवन से बेहद प्रभावित हुए थे। पूर्व विधायक सोमांश प्रकाश बताते हैं कि हरिद्वार जिले के नारसन क्षेत्र के गांव तांशीपुर में सोनी फाउंडेशन ट्रस्ट की ओर से दिव्यांगों तथा असहायों के लिए प्रस्तावित आश्रम के उद्घाटन समारोह में वीतराग संत के बुलावे पर तत्कालीन गवर्नर मोतीलाल वोरा पधारे थे। शिक्षा ऋषि ने ग्रामीण अंचल में स्कूलों की मान्यता अविलंब दिए जाने की मांग उनसे रखी थी। उसके बाद वोरा ने शिक्षा विभाग में शासन स्तर पर ग्रामीण अंचल की संस्थाओं को तत्काल मान्यता देने की कार्य योजना प्रारंभ कराई थी। भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम, शुकतीर्थ के पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज बताते हैं कि वर्ष 1995 में बीईजी रुड़की के तत्कालीन ब्रिगेडियर एवं कमांडेंट हरि उनियाल ने सैनिक विधवाओं के कल्याणार्थ समारोह रखा, जिसमें गुरुदेव ने तत्कालीन गवर्नर मोतीलाल वोरा के समक्ष सैनिकों की विधवाओं के लिए कल्याण संस्थान स्थापित कराने का आग्रह किया था। सभा के मंच पर मौजूद मोदीनगर के प्रसिद्ध उद्योगपति केएन मोदी ने वीतराग संत की प्रेरणा से बड़ी रकम दान देने की घोषणा की थी। जनसेवा कार्यों में स्वामी कल्याणदेव के त्याग और संकल्प को देखकर वोरा अचंभित हो गए थे। वोरा का निधन देश की राजनीति में अपूरणीय क्षति है।