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जनसंख्या नियंत्रण कानून के मसौदे पर विरोध और समर्थन में स्वर उभरे

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जनसंख्या नियंत्रण कानून के मसौदे पर विरोध और समर्थन में स्वर उभरे
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मुजफ्फरनगर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा प्रदेश में लागू होने वाले प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण कानून के मसौदे को लेकर स्वागत के साथ ही विरोध भी हो रहा है। एक वर्ग जहां इसे गैर जरूरी और चुनावी स्टंट बता रहा है, तो दूसरे वर्ग के लोग इसे देश-प्रदेश हित में बेहद जरूरी बताते हुए जल्द से जल्द लागू करने की मांग कर रहे हैं। इस मुद्दे को लेकर शहर के लोगों से वार्ता की तो कानून को लेकर दोनों वर्ग सहमत व विरोध में नजर आए।
सरकार की नीयत पर सवाल है कानून
शहर मुफ्ती जुल्फिकार का कहना है कि औलाद किस्मत वालों के यहां ही होती है। औलाद कितनी भी हों, जरूरी है कि मां-बाप उसे सही शिक्षा व संस्कार दें। कानून को लेकर सवाल सरकार की नीयत का है। यदि इसे सभी लोगों पर बिना भेदभाव लागू किया जाता है तो अच्छा है, अन्यथा गलत है।
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इस्लाम में नहीं कोई गुंजाइश
शहर काजी तनवीर आलम का कहना है कि इस्लाम में परिवार नियोजन की कोई गुंजाइश नहीं है। सरकार की इस पॉलिसी से नुकसान तो होगा, लेकिन संविधान का पूरी तरह से पालन किया जाएगा। कानून बनने के बाद यदि जरूरत महसूस हुई तो कोर्ट का भी सहारा लिया जाएगा।
महज चुनावी स्टंट है कानून
वरिष्ठ अधिवक्ता असद जमा का कहना है कि जनसंख्या नियंत्रण कानून महज चुनावी स्टंट है। प्रदेश में छह माह बाद चुनाव होने हैं। प्रदेश सरकार को चाहिए था कि अचानक इस तरह के स्टंट करने से बेहतर शिक्षा पर ब्लूप्रिंट जारी किया जाता।
खत्म होना चाहिए वोट देने का अधिकार
क्रांति सेना के अध्यक्ष ललित मोहन शर्मा का कहना है कि सरकार केवल वोट के लिए कानून को लागू करने का प्रयास कर रही है। कानून से केवल दो से अधिक बच्चों वाले परिवारों को मिलने वाली सरकारी सुविधाएं खत्म होगी, लेकिन इस तरह के लोग सरकारी सुविधाओं पर निर्भर नहीं है।
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पूरी तरह सरकार के साथ
- राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन के राष्ट्रीय संयोजक संजय अरोरा का कहना है कि उनका संगठन जनसंख्या नियंत्रण को लेकर सभी सांसदों को ज्ञापन देकर इसकी मांग कर चुका है। यह कानून बेहद जरूरी है।
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