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सखियन के उर ऐसी आयी ब्याह विनोद रचै सुखदायी

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प्राचीन श्री राधा वल्लभ मंदिर में श्री राधा नवरंगी लाल जी के सांझी ही उत्सव में फूलों से सांझी बन? - फोटो : DEVBAND
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देवबंद (सहारनपुर)। प्राचीन सिद्धपीठ श्री राधावल्लभ मंदिर में आयोजित श्री राधा नवरंगी लाल जी महाराज के सांझी उत्सव में रसिकों द्वारा ठाकुर जी की लीलाओं को सांझी के रूप में रंग बिरंगे फूलों से उकेरा जा रहा है।
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सांझी उत्सव में ठाकुर जी की विभिन्न प्रकार की लीला दर्शायी जा रही है, जिनमें मानसरोवर की लीला, मेहंदी लगाते हुए लीला, नित्य विहार लीला, नोक विहार और उपवन में झूला झूलने की लीला मुख्य है। मंदिर के सेवाधिकारी नीरज गोस्वामी ने बताया कि सांझी उत्सव में शुक्रवार को ठाकुर जी और श्रीराधारानी के विवाह की लीला को दर्शाया गया। ठाकुर जी और राधेरानी का विवाह ब्रह्मा जी द्वारा वृंदावन में भांडीरवन नामक स्थान पर कराया गया था। ब्रह्मा जी द्वारा स्वयं ठाकुर जी और राधेरानी का विवाह गठबंधन करके मंत्रों द्वारा पूर्ण कराया गया था। यह स्थान आज भी वृंदावन में भांडीरवन के नाम से विख्यात है। मंदिर में विवाह उत्सव की सांझी बनाते हुए पदों का गायन भी किया गया। जिसमें सखियन के उर ऐसी आयी, ब्याह विनोद रचै सुखदायी तथा लाडो जी थारो अविचल रहे जी सुहाग के पदों का विशेष गायन वैष्णव भक्तो द्वारा किया गया। जबकि सुशील गोयल, अरुण गोयल, मोनू बंसल, प्रदीप गोयल, सतेन्द्र बंसल, अमित कंसल ने विवाह उत्सव के पदों का गायन किया। इस अवसर पर फूलों की सुंदर सांझी की रचना पुष्पा गोयल, रेखा गोयल, ललिता गोस्वामी, टीना गोस्वामी और प्रीति ने मिलकर की। इस मौके पर हितेश गोस्वामी, अभिषेक गोस्वामी, निकुंज गोस्वामी और मयंक गोस्वामी आदि रहे।

फूलों से बनाई गई ठाकुर जी और राधे रानी की मनमोहक सांझी- फोटो : DEVBAND

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