ककरौली। वन विभाग को सफलता न मिलते देख गांव दौलतपुर के लोगों ने खुद ही तेंदुए की तलाश शुरू कर दी है। तेंदुए को तलाशने के लिए ग्रामीण लाठी, डंडे एवं भाले लेकर जंगल की ओर दौड़ पड़े। तेंदुए की दहशत ने ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। जिसके डर से गांव के किसानों ने अपने खेतों पर भी जाना बंद कर दिया है। दहशत में बच्चे घर में ही कैद रहने को मजबूर हो रहे हैं। बच्चे और महिलाएं पूरी तरह से भयभीत हैं। एक किसान ने फिर तेंदुए को गन्ने के खेत से दौड़ कर निकलते हुए दूसरी खेत की ओर भागते हुए देखा है।
गांव दौलतपुर निवासी किसान तैय्यब अपने खेत पर जा रहा था। जैसे ही वह खेत के नजदीक पहुंचा, तो उसने तेंदुए को दौड़ कर चकरोड को पार कर दूसरे खेत में घुसते हुए देखा है। मुस्तफा खेत पर चारा लेने जा रहा था। जब अपने खेत पर पहुंचा, तो बराबर वाले गन्ने के खेत में उसने तेंदुए की दहाड़ऩे की आवाज सुनी। जिसे सुनते ही वह भयभीत होकर गांव की ओर भाग गया। इन दोनों ने गांव में जाकर ग्रामीणों को जंगल में तेंदुए के होने के बारे में बताया। जिसे सुनते ही ग्रामीण साजिद, हुसैन अहमद, शहजाद, शमशाद, मुजम्मिल, रिजवान, मोहम्मद अनस, नजर मोहम्मद, इरफान, शमीम, अब्दुल सलाम, अफसर, वीर सिंह, इंतजार, मोनीष, धर्मेंद्र, पप्पू, उस्मान, सतीश, इरशाद आदि अपने हाथों में लाठी, डंडे एवं भाले लेकर गांव से जंगल की ओर निकल पड़े और तेंदुए को तलाश करने लगे। तेंदुए की सूचना मिलते ही वन विभाग के दरोगा सबी हैदर एवं वन रक्षक अनिल कुमार पहुंचे। वन विभाग कर्मियों ने ग्रामीणों के साथ तेंदुए की तलाश की। जहां पर ग्रामीण ने तेंदुए की दहाड़ने की आवाज सुनी थी। ग्रामीणों ने वहां पर वन विभाग कर्मियों जानवर के पंजों के निशान भी दिखाए। जिनको देख वन कर्मियों ने बताया कि यह तेंदुए के पंजों के निशान नहीं है। घंटों जंगलों में तलाश करने के बाद भी तेंदुआ नहीं मिल सका।
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-गांव में सन्नाटा पसरा
गांव दौलतपुर के लोगों ने बताया कि तेंदुए की आहट से वह जंगल में अपने खेतों में कुछ भी काम नहीं कर पा रहे हैं। जिससे किसानों की गन्ने की छिलाई का काम भी बंद हैं। मजदूर खेतों में गन्ना छिलाई करने से मना कर रहे हैं। किसान भी अपना सभी कामकाज को छोड़कर अपने घरों में रहने को मजबूर हैं। गांव में दिन से ही सन्नाटा छाया रहता है।
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-तेंदुए का तीन दिन बाद भी पता नहीं चल सका
जंगल में तेंदुए के दस्तक दिए तीन दिन बीत चुके हैं, लेकिन अभी तक तेंदुए का कोई सुराग नहीं लग सका है। दहशत के चलते गांव में लोगों को सतर्कता बरतने के लिए दिन में कई कई बार मुनादी कराई जा रही है। लोग शाम होते ही लोग अपने घरों में चले जाते हैं, जबकि कुछ ग्रामीण पूरी रात घरों के आसपास लाठी डंडे एवं भाले ले लेकर तेंदुए से निपटने को पहरा दे रहे हैं।