400 साल पुरानी परंपरा को सहेजे हैं ग्रामीण
भोपा (मुजफ्फरनगर)। धीराहेड़ी गांव में चार सौ वर्ष पुरानी होली की परंपरा आज भी कायम है। यहां होली पर्व पर दो दिन तक घर-घर कढ़ा प्रसाद (हलवे का प्रसाद) बनता है। लगभग तीन हजार की आबादी वाला धीराहेड़ी जाट बिरादरी बहुल गांव है। ये खुद को बाबा बिद्दी का वंशज बताते हैं।
भोपा से पांच किलोमीटर दूर स्थित गांव धीराहेड़ी के बुजुर्गों का कहना है कि बाबा बिद्दी यहां सुनसान स्थान पर एक कुएं के समीप डेरा डालकर रहने लगे थे। वह कुंआ आज भी मौजूद है। उसी समय की तीन बीघा भूमि आज भी बाबा के नाम से जानी जाती है जो खाली पड़ी है। ग्रामीण आज भी होली पर चली आ रही चार सौ वर्ष पुरानी परंपरा को निभा रहे हैं। होली व दुल्हेंड़ी को पूरे गांव में लोग हलवे का प्रसाद बना कर पूजते हैं। प्रसाद को ग्रामीण बाबा का कढ़ा प्रसाद बताते हैं। प्रसाद का पूरे गांव में वितरण होता है। ग्राम प्रधान सुक्रमपाल, चौधरी विरेंद्र सिंह, चौधरी राजबीर सिंह, ऋषिपाल, वेदपाल सिंह, सौराज सिंह, चौधरी महिपाल सिंह, रेशपाल सिंह आदि बताते हैं कि गांव में एक दो परिवारों को छोड़ बाकी लोग बाबा बिद्दी के वंशज हैं। बाबा बिद्दी ने लगभग चार सौ वर्ष पूर्व इस परंपरा को शुरू किया था। बाबा बड़े धैर्य वाले व्यक्ति थे। इसलिए इस स्थान को धीराहेडी़ के नाम से जाना जाने लगा था। धीराहेड़ी गांव के बीच में आज भी वह कुआं मौजूद है, जहां बाबा बिद्दी ने डेरा डाला था।