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मुजफ्फरनगर के अथाई निवासी वेदपाल सिंह ने पाक के विरुद्ध लड़ी थी लड़ाई

Mon, 04 Mar 2019 12:15 AM IST
Deepak Kausik अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
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भोपा के गांव अथाई निवासी पूर्व सैनिक वेदपाल सिंह ने पाकिस्तान के खिलाफ 1958 के अलावा 1965 और 1971 की सभी लड़ाई लड़ी थी। उन्होंने परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद के साथ मिल कर पाकिस्तान के  टैंकों को उड़ाया था। गांव अथाई निवासी 83 वर्षीय वेदपाल सिंह वर्ष 1958 में आर्मी की फोर ग्रेनेडियर टीम में भर्ती हुए थे। पाक के विरुद्ध लड़ी गई 1965 की लड़ाई का जिक्र करते हुए वे बताते हैं कि उनकी बटालियन पाक के सीमावर्ती क्षेत्र खेमकरण सेक्टर में तैनात थे। कंपनी क्वार्टर मास्टर हवलदार परमवीर अब्दुल हमीद की टीम में वे ग्रेनेडियर थे।
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उसी दौरान पाक ने अमेरिका से शक्तिशाली चार पैटर्न नामक टैंक खरीदे थे। युद्ध में उनका इस्तेमाल किया जा रहा था। उसी दौरान वीर अब्दुल हमीद ने पाक के उन चार टैंकों में से दो को गोले दाग कर नष्ट कर दिया था। तीसरे पैटर्न टैंक को तोड़ने के समय वे वीरगति को प्राप्त हो गए थे। वे भी उस समय चंद कदमों की दूरी पर  मोर्चा थामे पाक सेना व टैंकों पर ग्रेनेड दाग रहे थे। उन्होंने बताया कि वीर अब्दुल हमीद उनसे बहुत स्नेह रखते थे। 1971 में भारत-पाक युद्ध व बांग्लादेश निर्माण के समय भी वो युद्ध में अग्रणी रहे।

1962 में एक बार चीन सीमा के गरीब इच्छोगल( तिब्बत ) में उनकी टीम रास्ता भटक गई थी। उसी दौरान एक तिब्बती युवक से उन्होंने रास्ता पूछा. तो उसने रास्ता बताने के बदले उनसे उनका कंबल मांगा। भरी सर्दी में वेदपाल ने उस व्यक्ति को अपना कंबल दिया था। उसके बाद वह टीम के साथ सुरक्षित स्थान पर पहुंचे थे। पूर्व सैनिक के इकलौते बेटे रविंद्र सिंह व पौत्र कुश चौधरी बताते हैं कि इस उम्र में भी वो अपने आवश्यक कार्य खुद ही करते है।
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सरकार से पाक के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग
भोपा। पूर्व सैनिक वेदपाल सिंह कहते है किसी भी देश की असली शक्ति उसके सैनिकों के मनोबल में होती है, न की मशीनरी में। सरकार को अपने सैनिकों के मनोबल को और बढ़ाना होगा। उन्होंने पाक को धोखेबाज बताते हुए उसके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग सरकार से की। जांबाज अभिनंदन के भारत लौटने पर हर्ष जाहिर किया हैं।

बहन के ससुर से मिली थी सेना में जाने की प्रेरणा
भोपा। वेदपाल सिंह की छोटी बहन ओमकारी की ससुराल देवबंद के गांव गुनारसा में थी। वे बताते हैं कि वह अपनी बहन से मिलने के लिए गुनारसा गए थे। उसी दौरान बहन के ससुर ने सेना भर्ती होने की बात कही तो वह अगले ही दिन नसीराबाद भर्ती में पहुंच गए, जहां उन्हें सेना में भर्ती कर लिया गया। उन्हें वेतन के रूप में मात्र ढाई रुपये प्रतिमाह मिलता था। उनका कहना है कि वे वेतन के लिए नहीं, वतन के लिए सेना में भर्ती हुए थे।

85 जवानों को छूकर निकल गई थी मौत
बुढ़ाना/परासौली। गांव दुर्गनपुर खेड़ा के भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त वारंट ऑफिसर ठाकुर रोहताश सिंह वर्ष 1965 व 1971 का युद्ध लड़ चुके हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 1965 की लड़ाई में दार्जलिंग के पास बाग डोगरा में मौत उनके पास से होकर गुजरी थी। 85 जवानों सहित उन्होंने खाई में लेटकर दुश्मन पर वार किया था। इस लड़ाई में उनकी कंपनी का वनपायर जेट फाइटर विमान जल गया था।

बुढ़ाना क्षेत्र के दुर्गनपुर खेड़ा गांव के भारतीय वायु सेना के सेवानिवृत्त वारंट ऑफिसर ठाकुर रोहताश सिंह जून 1963 भारतीय वायु सेना में भर्ती हुए थे। वे जून 1978 में वारंट ऑफिसर के पद से रिटायर हुए। अमर उजाला के साथ वार्ता में उन्होंने बताया कि 7 सितंबर 1965 में वे 85 जवानों के साथ बाग डोगरा मे तैनात थे। अचानक उनकी बटालियन के ऊपर हवाई अटैक हुआ। इस हवाई अटैक में आनन फानन में सभी जवानों ने खाई में लेटकर उस अटैक का जवाब दिया था। इस हवाई अटैक में मौत उनके व जवानों के पास से होकर गुजर गई थी।

अचानक हुए अटैक के कारण उनके जेट फाइटर वनपायर में ब्रस्ट लगने के कारण वह जल गया था। किसी भी जवान को खरोच नहीं आई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 1971 में उन्होंने अपनी बटालियन के साथ तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान पर हमला किया था। इस हमले में भारत की तीनों सेनाएं शामिल थी। इस युद्ध में भारत ने दुश्मन को सरेंडर करने पर मजबूर कर दिया था। पूर्वी पाकिस्तान आज बांग्लादेश के नाम से जाना जाता है। 

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने हर बार मुंह की खाई हैै। भारत के दबाव में पाक विंग कमांडर अभिनंदन को छोड़ने पर मजबूर हुआ। भारतीय वायुसेना ने सर्जिकल स्ट्राइक से पाक में आतंकियों के ठिकानों को तबाह कर अच्छी कार्रवाई की है।  पूर्व सैनिक रोहताश सिंह वर्तमान में गांव में एक कान्वेंट स्कूल चलाकर क्षेत्र के बच्चों को संस्कारित शिक्षा दे रहे हैं।
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