Muzaffarnagar News: मुजफ्फरनगर के गांव मांडी स्थित अंकित बालियान की फैक्टरी में मजदूरों को बंधक बनाकर यातनाएं दी जा रही थीं। एक मजदूर किसी तरह भाग कर पुलिस के पास पहुंचा, तो मामला खुला। अन्य मजदूरों को भी मुक्त कराया गया। अंकित को पलवल में गिरफ्तार किया गया है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मुजफ्फरनगर में बंधुआ मजदूरों के शोषण के मामले का संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव और डीजीपी को नोटिस थमाया है। आयोग ने एक पेपर प्लेट फैक्ट्री में 12 मजदूरों के साथ मारपीट और उन्हें करीब डेढ़ साल तक बंधुआ बनाकर काम कराने की जानकारी मिलने पर इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मुद्दा मानते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
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आयोग द्वारा जारी नोटिस के मुताबिक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार मजदूरों को बिना पर्याप्त भोजन और मजदूरी के आधी रात तक काम करने के लिए मजबूर किया गया। एक मजदूर फैक्ट्री से भागने में सफल रहा और उसने पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद अन्य मजदूरों को बचाया जा सका। उनकी चिकित्सीय जांच में खरोंच, कटने के निशान और हड्डी टूटने जैसी कई चोटें पाई गईं। लंबे समय तक शारीरिक शोषण के संकेत भी मिले हैं।
पुलिस को एक व्यक्ति की मौत का भी पता चला है। अन्य मजदूरों की मौत होने का पता लगाने की जांच चल रही है। इसके अलावा मुजफ्फरनगर के डीएम को भी श्रम और रोज़गार मंत्रालय की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के तहत जांच करने को कहा है। इसके अलावा बंधुआ मजदूरी प्रणाली (उन्मूलन) अधिनियम, 1976 के अनुसार भी जांच होगी।
आयोग ने 8 दिसंबर 2021 की अपनी सलाह 2.0 के अनुसार मजदूरों का ई-श्रम पोर्टल पर तुरंत पंजीकरण करने का भी निर्देश दिया है। अब तक की जांच में सामने आया है कि पीड़ित मजदूर उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, राजस्थान, हरियाणा, छत्तीसगढ़, झारखंड और नेपाल से थे।
उन्हें नौकरी, नियमित वेतन, भोजन और रहने की सुविधा का लालच देकर लाया गया था। फैक्ट्री पहुंचने पर उनके मोबाइल और पहचान के दस्तावेज़ जब्त कर लिए गए, जिससे वे अपने परिवारों से संपर्क नहीं कर पाए। उनको डराने और भागने से रोकने के लिए पिटबुल कुत्तों का इस्तेमाल करने का भी आरोप है।