बीस साल पहले चंद बच्चों को लेकर जिले के गांव खुड्डा में पब्लिक स्कूल शुरू करने वाले कमर इंतखाब ने यूपी बोर्ड परीक्षा में नकल कराकर अकूत दौलत कमा ली है। पैसे की ताकत से वह डीआईओएस से अपनी मर्जी का परीक्षा केंद्र बनवाता रहा। उसका साम्राज्य ऐसा फैला कि दूसरे राज्यों के फेल विद्यार्थी इंतखाब की कमाई की बड़ी मछली बन गए। एसटीएफ ने उसके पास से अवैध पिस्टल और कारतूस भी बरामद किए हैं।
छपार थाना क्षेत्र के गांव की पहचान डॉ जाकिर हुसैन मेमोरियल इंटर कॉलेज से होती है। वर्ष 1998 में अपने गांव खुड्डा में रोजगार के लिए कमर इंतखाब ने एक पब्लिक स्कूल खोला था। गांव के कुछ बच्चों को पढ़ाने में कई साल बीत गए। बड़ा आदमी बनने की चाहत में उसने फेल विद्यार्थियों को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कराने का धंधा शुरू कर दिया। डीआईओएस दफ्तर के बाबुओं ने उसकी योजनाओं को परवान चढ़ा दिया। उसके बाद इंतखाब का हौसला बढ़ता गया और उसने गैर राज्यों और गैर बोर्ड के फेल विद्यार्थियों को दसवीं और 12वीं कराने का बड़ा गेम शुरू किया।
हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली और यूपी से फिलहाल हर वर्ष लगभग एक हजार अभ्यर्थी उसके ग्राहक बन चुके थे। 80 से 90 प्रतिशत तक अंक दिलाने की वजह से उसकी मांग बढ़ती गई। शिक्षा विभाग में इंतखाब की ऐसी धमक रही कि अफसर से लेकर कर्मचारी तक उसकी अंगुली पर नाचते रहे। यदि किसी ने उसका सेंटर निरस्त कराने की कोशिश की, तो उसने लखनऊ से पैरवी कराकर हर आदेश निरस्त करा दिया। सरकारें आई और गई, मगर इंतखाब का खेल चलता रहा।
एसटीएफ यह भी जांच कर रही है कि नकल माफिया डराने धमकाने के लिए अवैध पिस्टल और अन्य हथियारों का इस्तेमाल करता था। बाद में इंतखाब के साथ उसका भाई अख्तर भी नकल धंधे को संभालने लगा। दौलत बरसी तो उन्होंने खुड्डा गांव से बाहर शहर के रामपुरम में आलीशान कोठी बनाई। एसटीएफ उसकी संपत्ति को भी खंगालने में जुटी है।
खुड्डा में लगा तीन कॉलेजों का सेंटर
छपार। नकल माफिया इंतखाब का पब्लिक स्कूल अब डॉ जाकिर हुसैन मेमोरियल इंटर कॉलेज बन चुका है। फिलहाल यहां 400 छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। तीन मंजिला भवन में आधा दर्जन गांव के बच्चे पढ़ने आते हैं। छपार, रोहाना और बड़कली इंटर कॉलेज का परीक्षा केंद्र यहां बना है। एसटीएफ के छापे के बाद खुड्डा में गहमागहमी है।
फर्जी कक्ष निरीक्षक करा रहे थे बोर्ड परीक्षा
योगी सरकार की सख्ती से बेपरवाह नकल माफिया ने जनता इंटर कॉलेज बाढ़ के परीक्षा केंद्र पर डीआईओएस दफ्तर की मिलीभगत से फर्जी कक्ष निरीक्षकों की ड्यूटी लगा रखी थी। एसटीएफ ने जिन 17 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, उनमें से 14 आरोपी गैर कानूनी तरीके से फिजिक्स पेपर की परीक्षा के समय सेंटर के कक्षों में पकड़े गए। हैरानी की बात यह है कि इनके पास डीआईओएस दफ्तर से जारी फर्जी कक्ष निरीक्षक के कार्ड बरामद हुए।
एसटीएफ की कार्रवाई में नकल माफिया कमर इंतखाब और उसके भाई अख्तर के कारनामों का ऐसा खुलासा हुआ है, जिसमें बोर्ड परीक्षा की पूरी व्यवस्था को हाईजैक कर लिया गया। इंटरमीडिएट भौतिक विज्ञान विषय के पेपर में जब एसटीएफ ने बाढ़ के जनता इंटर कॉलेज में छापा मारा, तो इमला बोलकर परीक्षार्थियों को नकल कराई जा रही थी। ज्यादातर कमरों में फर्जी कक्ष निरीक्षक ड्यूटी दे रहे थे। उनकी आईडी चेक की गई तो उनके पास बाकायदा डीआईओएस दफ्तर से जारी पहचान पत्र मिले। कुछ देर तक एसटीएफ भी नहीं समझ पाई कि ड्यूटी पर पाए शिक्षक असली हैं या नकली।
पूछताछ में पर्दाफाश हुआ कि जो 14 आरोपी परीक्षा सेंटर पर परीक्षा कराते मिले हैं, वे सब फर्जी हैं। उनमें ज्यादातर सॉल्वर थे, जो बोल-बोलकर छात्र-छात्राओं को फिजिक्स के प्रश्नों के उत्तर बता रहे थे। एसटीएफ के सीओ अमित नागर ने डीआईओएस प्रवीण कुमार मिश्रा से पूछा कि फर्जी कक्ष निरीक्षकों को सेंटर में आने की अनुमति किसने दी, जिन्हें नियम के मुताबिक ड्यूटी पर लगाया गया वह कहां हैं। हक्के बक्के डीआईओएस ने कहा कि जो आईडी कार्ड नकल कराते लोगों से पकड़े गए, उस पर मेरे फर्जी हस्ताक्षर हैं।
सीओ ने पास खड़े केंद्र व्यवस्थापक एवं प्रधानाचार्य योगेंद्र पाल सिंह के आईडी कार्ड और फर्जी कक्ष निरीक्षकों से बरामद आईडी कार्ड मिलाए। सीओ ने कहा कि दोनो सिग्नेचर में कोई अंतर नहीं है। इस पर डीआईओएस ने चुप्पी साध ली। एसटीएफ सीओ ने कहा कि एक्सपर्ट से फर्जी कक्ष निरीक्षकों को जारी हुए कार्डों पर जारी डीआईओएस के सिग्नेचर की जांच कराई जाएगी। नकल माफिया कमर इंतखाब और उनके भाई असर नफीस उर्फ अख्तर ने सहारनपुर, रुड़की और मुजफ्फरनगर आदि से शिक्षित और प्राइवेट टीचर्स को परीक्षा सेंटर पर कक्ष निरीक्षक बना रखा था।
नकल माफिया के चंगुल में फंस गए शिक्षाविद्
मोटी कमाई के फेर में जनता इंटर कॉलेज बाढ़ के प्रधानाचार्य एवं केंद्र व्यवस्थापक योगेंद्र पाल सिंह अपना भविष्य ही दांव पर लगा दिया। चार साल पहले ही उन्हें प्रिंसिपल बनने का मौका मिला था। दो साल पहले वह नकल माफिया कमर इंतखाब के जाल में फंस गए। लगातार दो साल से बाढ़ कॉलेज नकल कराने को परीक्षा केंद्र बनवाया गया था। हाथरस जिले के गांव कानव निवासी योगेंद्र पाल सिंह भूगोल में एमए के साथ बीएड उत्तीर्ण हैं। फरवरी 1988 में उनकी नियुक्ति शिक्षक के तौर पर हुई थी। माध्यमिक शिक्षा आयोग से उन्हें जुलाई 2015 में कॉलेज का प्रधानाचार्य बनने का अवसर मिला।
विद्यार्थियों को भूगोल विषय पढ़ाने वाले सिंह नकल माफिया के लालच में फंस गए। गैर राज्य और गैर बोर्ड के 500 से ज्यादा विद्यार्थियों को विज्ञान वर्ग से इंटरमीडिएट में उत्तीर्ण कराने के लिए नकल माफिया कमर इंतखाब ने वर्ष 2018 में पहली बार बाढ़ कॉलेज को डीआईओएस दफ्तर से मिलीभगत कर परीक्षा केंद्र बनवा लिया। उस साल सेंटर पर ऐसे ही नकल हुई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। प्रधानाचार्य की सेवानिवृत्ति 2021 में होनी थी, लेकिन नकल कराने के आरोप में उन्हें जेल की सलाखों के पीछे जाना पड़ा।