देवबंद। महाशक्ति मां जगदंबा के रूप में शक्तिपीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर देवबंद में आदि अनादि काल से स्थित है। भवन के अंदर श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी पिंडी रूप में विराजमान है। यहां आने वाले भक्तों की सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना अवश्य पूरी होती है। चैत्र नवरात्र की चतुर्दशी तिथि को मंदिर पर भव्य मेला आयोजित किया जाता है। मेले की सभी व्यवस्थाएं नगरपालिका परिषद द्वारा की जाती है।
मां का आशीर्वाद पाने वालों में दिवंगत प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, उत्तर प्रदेश के दिवंगत मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह के अलावा हरियाणा, राजस्थान आदि प्रदेशों के कई कैबिनेट व राज्यमंत्री शामिल हैं। श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित सतेंद्र शर्मा ने बताया कि पिंडी रूप में विराजमान मां श्री त्रिपुर बाला सुंदरी देवी की चांदी की मूर्ति को पुजारी आंखें बंद करके स्नान कराते हैं। बताया जाता है कि पूर्व में किसी पुजारी ने भूलवश स्नान कराते समय आंखें खोल ली थी तो वह अंधा हो गया था। उन्होंने बताया कि चैत्र मास की चतुर्दशी तिथि को आयोजित होने वाले मेले से पूर्व तेज हवाओं के साथ बूंदाबांदी भी होती है। यह चमत्कार अनादि काल से होता चला आ रहा है। उन्होंने बताया कि महाभारत काल में पांडवों ने अज्ञातवास दौरान कुरुक्षेत्र जाने से पूर्व कुछ समय यहां पर व्यतीत किया था। मंदिर परिसर में स्थित सरोसर में जनाजा घाट बना हुआ है। यहीं पर द्रौपदी स्नान आदि किया करती थी। धनुर्धर अर्जुन ने मां जगदंबा और युधिष्ठिर ने ग्यारहमुखी महादेव की आराधना की थी।
वैज्ञानिक भी नहीं पढ़ सके पत्थर पर अंकित भाषा
शक्तिपीठ की पौराणिकता का प्रमाण मंदिर में मां के भवन के द्वार पर लगे पत्थर पर अंकित उस भाषा से मिलता है, जिसे आज तक पुरातत्व विभाग के वैज्ञानिक भी नहीं पढ़ सके। शक्तिपीठ का अंतिम जीर्णोद्धार राजा रामचंद्र महाराज द्वारा कराए जाने की बात प्रचलित है।
शक्तिपीठ के ये हैं पवित्र स्थल :
करीब 40 बीघा जमीन में स्थित मंदिर प्रांगण में माता शाकंभरी देवी, महाकाली, भैरवनाथ, हनुमानजी, शिव शंकर व पार्वती, अन्नपूर्णा, ध्यानु भगत और श्री ग्यारहमुखी महादेव मंदिर आदि पवित्र स्थल हैं।
शक्तिपीठ श्री त्रिपुर मां बाला सुंदरी देवी मंदिर- फोटो : DEVBAND