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विधानसभा चुनाव से पहले हो जाएगा ट्रायल

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विधानसभा चुनाव से पहले हो जाएगा ट्रायल
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मुजफ्फरनगर। राजनीतिक दल जिला पंचायत के चुनाव को 2022 के विधानसभा चुनाव का ट्रायल मानकर चल रहे हैं। कई राजनीतिक दलों की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी हुई है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि निर्दलीय पार्टियों के घोषित प्रत्याशियों से ज्यादा जीत सकते हैं।
जिला पंचायत सदस्यों के चुनाव में इस बार राजनीतिक दलों ने अपने समर्थित प्रत्याशियों की सूची जारी कर उनके लिए प्रचार भी किया। भाजपा जिले में सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। वर्ष 2015 के चुनाव में भाजपा के चार जिला पंचायत सदस्य चुनाव जीते थे। हालांकि केंद्रीय राज्यमंत्री संजीव बालियान ने निर्दलियों को साथ लेकर जिला पंचायत के अध्यक्ष पद पर कब्जा कर लिया था। पांच साल तक आंचल जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं।
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इस बार भाजपा समर्थित 43 में से 42 वार्डों पर चुनाव लड़ रही है। रालोद और सपा अधिकतम सीटों पर मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं। किसान आंदोलन के बाद रालोद को यह लग रहा है कि वह अच्छा स्कोर करेगा। रालोद नेता इसे विधानसभा चुनाव का ट्रायल मानकर चल रहे हैं। रालोद नेता 15 सीटों पर जीत का दावा कर रहे हैं। सपा ने भी दस वार्डों से अधिक में जीत का दावा कर रही है। बसपा, कांग्रेस, आप और आजाद समाज पार्टी भी मैदान में है। इन दलों के खाते भी खुल सकते हैं। जिला पंचायत के तमाम वार्डों में निगाहे दौड़ाने के बाद जो हकीकत सामने दिखाई दे रही है, उसमें जिले में राजनीतिक दलों से घोषित प्रत्याशियों से अधिक निर्दलीय बाजी मार सकते हैं। यह चुनाव दलीय न होकर व्यक्तिगत आधार पर अधिक लड़ा जाता है, जो चुनाव में दिखाई भी पड़ रहा है।
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