चने खाकर कर रहे घर की ओर सफर
भोपा। शाहजहांपुर निवासी प्रवासी मजदूर अनिल, मंजित, सुंदर, अमित निखिल, सुमन देवी, रिंकी आदि कई माह से उत्तराखंड हरिद्वार क्षेत्र में फैक्टरी में काम कर रहे थे। लॉकडाउन में सब कुछ बंद गया। मालिक ने मजदूरी भी नहीं दी। पैसा खत्म हो गया और आगे काम नहीं बचा तो पैदल ही अपने जिले की ओर चल दिए।
वह लगातार अपने काम पर लगे हुए थे। इसी माह उन्हें फैक्टरी स्वामी ने काम से हटा दिया था। मजदूरों का कहना है कि उन्हें उनकी मजदूरी की रकम तो दी ही नहीं साथ ही भरपेट भोजन भी नहीं मिल रहा था। दो दिन पूर्व वे अपना सामान छोड़कर रात्रि में जंगलों के रास्ते अपने घर के लिए निकल पड़े थे। रास्ते में एक स्थान पर उन्हें एक व्यक्ति ने चने दिए, जिन्हें पानी में भीगो कर खा रहे हैं। उक्त 20 प्रवासी मजदूरों ने रविवार सुबह दस बजे के करीब उत्तराखंड की सीमा को छोड़ यूपी के सीमावर्ती गांव मजलिसपुर तौफिर में प्रवेश किया। यूपी में प्रवेश से अब उन्हें अपनी चौखट तक जाने की आस बंध गई है। प्रवासी मजदूरों में गर्भवती महिला भी शामिल है।
प्रवासी मजदूरों की सेवा में जुटे मोरना के युवक
भोपा। मोरना निवासी युवक भूखे-प्यासे व कड़ी धूप में पैदल चलकर अपने घरों की ओर जा रहे प्रवासी मजदूरों को की सेवा में लगे हुए हैं। मोरना निवासी सुनील कुमार, धर्मेंद्र कुमार, शंकर, सन्नी, मोनू, सैंकी, सतपाल, मेघपाल, ज्ञान सिंह, गय्यूर और आदि युवक चावल तैयार कर छछरौली व मोरना के बीच थके व भूखे प्रवासी मजदूरों को खिला रहे हैं। सुनील कुमार ने बताया कि वह यह कार्य पिछले एक सप्ताह से कर रहे हैं। अगर उन्हें पांच किलोमीटर तक भी कोई प्रवासी मजदूरों की सूचना मिलती है तो वे वहीं जाकर उन्हें भोजन कराते हैं।