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उम्मीद की मशाल: देश के लिए सैनिक तैयार कर रहे मुजफ्फरनगर के विनोद

Sun, 22 May 2022 11:30 PM IST
मेरठ ब्यूरो मदन बालियान, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

उनका मकसद है क्षेत्र के अधिक से अधिक युवाओं को देश सेवा के लिए सेना में भेजना। फौजी के नाम से पहचान रखने वाले प्रधान आसपास के चार गांव के युवाओं को सेना में भर्ती का अभ्यास कराते हैं।
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युवाओं को शारीरिक अभ्यास कराते प्रधान विनोद पुंडीर। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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विस्तार
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मुजफ्फरनगर जनपद के रोनी हरजीपुर के प्रधान और सेना के ऑनरेरी सूबेदार मेजर विनोद पुंडीर (51) देश और समाजसेवा की नई इबारत लिख रहे हैं। फौजी के नाम से पहचान रखने वाले प्रधान आसपास के चार गांव के युवाओं को सेना में भर्ती का अभ्यास कराते हैं। यह उनकी ट्रेनिंग का कमाल है कि युवाओं का चयन सेना में हुआ। युवाओं के खेलों के प्रति प्रोत्साहित करते हैं।

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रोनी हरजीपुर के भमेला, बिरालसी और नहर पटरी पर सुबह-शाम दौड़ लगाते युवाओं में विनोद जोश भरने का काम कर रहे हैं। सेना में भर्ती के लिए अभ्यास और शाम को खुद प्रधान स्टेडियम में युवाओं को वॉलीबाल खिलाते हैं। वर्तमान प्रधान हैं और सेना में ऑनरेरी सूबेदार मेजर रहे। छह साल पहले स्वैच्छिक सेवानिवृत्त लेकर घर लौटे। आज पूरा क्षेत्र उन्हें फौजी के नाम से ही जानता है।

उनका मकसद है क्षेत्र के अधिक से अधिक युवाओं को देश सेवा के लिए सेना में भेजना। खेलों में शामिल कर युवा शक्ति का सदुपयोग करना। शुरूआत हुई आसपास भमेला, मंगनपुर के युवा भी अभ्यास के लिए पहुंचने लगे। अभी तक कई युवा उनकी प्रेरणा और अभ्यास कराने से नौकरी पा चुके हैं। युवाओं को सेना और पुलिस भर्ती के लिए कार्यक्रम बनाकर देना, कामयाबी के टिप्स, अलग अलग चरणों में दौड़ लगाकर पसीना बहाने के बारे में प्रशिक्षण देना फौजी की दिनचर्या है।
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प्रधान बने तो दिल्ली तक चमकाया नाम
ग्रामीणों ने उन्हें प्रधान बनाकर नई जिम्मेदारी दी। दिल्ली अमृत महोत्सव में जिले का प्रतिनिधित्व किया। चरथावल ब्लॉक से उनका नाम चयनित हुआ था। उनका कहना है वह तीन महीने की योजनाओं का खाका ब्लॉक के अधिकारियों को सौंप देते हैं।

सेना से चार पीढ़ियों का नाता
प्रधान विनोद की पहचान फौजी के नाम से है। उन्होंने पूर्वजों की प्रेरणा से देश सेवा के लिए बीड़ा उठाया। बताते हैं कि बाबा मुरली सिंह गांव के युवाओं में जोश भरते थे। उन्हीं के मार्गदर्शन से वह सेना में भर्ती हुए थे। बकौल प्रधान वह चौथी पीढ़ी के सेना में गए थे।

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अंग्रेजी हुकूमत में परबाबा निरंजन, हरकेश सिंह और कालू सेना में रहे। उनके बाद बाबा मुरली सिंह हवलदार, घनश्याम सिंह सिपाही और जबर सिंह मेजर से रिटायर हुए थे। जबर सिंह ने 1962 और 1965 का युद्ध लड़ा था। ताऊ विजयपाल सिंह पुंडीर ने देश के लिए सरहद पर 1962 65 और 71 तीनों लड़ाई लड़ी थीं।

फौजी कर रहे अपने गांव की चिंता
रोनी हरजीपुर खिलाड़ियों और फौजियों का गांव है। गांव में सेना से रिटायर्ड हुए करीब 20 से 25 फौजी हैं, जो विनोद पुंडीर के साथ मिलकर अपने गांव को आगे बढ़ाने के लिए योजनाएं बनाते हैं। असम में सेना में तैनात श्रवण शर्मा ने बताया कि भर्ती की तैयारी के दौरान प्रधान विनोद पुंडीर के मार्गदर्शन में मेहनत की। वह युवाओं को तराशने का सराहनीय कार्य कर रहे हैं।

सेना में कार्यरत सोहन के भाई रवि ने बताया कि युवाओं को सेना और अन्य भर्ती के लिए तैयार करने में सूबेदार मेजर ने युवाओं का खूब सहयोग किया है। वह टाइम टेबल बनाकर देते हैं। मुरादाबाद में तैनात सिपाही अरुण शर्मा का कहना है कि भर्ती की तैयारी में मदद की। शारीरिक परीक्षा के लिए वह युवाओं को तैयार करते हैं और मार्गदर्शन भी करते हैं।
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