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किसान ने कफन ओढ़ा तो 50 हजार मांगने वाले बोले, हम देंगे 10 लाख

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मुजफ्फरनगर : लच्छेड़ा में एसडीएम सदर से बातचीत करते रालोद नेता अजीत राठी। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। वक्त का खेल देखिए...। पिछले दस साल में किसान वेद कश्यप 50 हजार रुपये नहीं जुटा पाया। जमीन की नीलामी की मुनादी हुई तो इज्जत और जिंदगी दोनों चली गई। किसान ने कफन ओढ़ा तो 50 हजार रुपये मांग रहे अधिकारियों ने परिवार को 10 लाख की आर्थिक सहायता का भरोसा दिया।
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लच्छेड़ा के चार किसानों ने 10 साल पहले शाहपुर के किसी परिचित की 50-50 हजार रुपये की जमानत कराई थी। आरोपी जेल से निकला तो फिर कभी अदालत तक नहीं पहुंचा, ऐसे में किसान फंस गए। अदालत ने सदर तहसीलदार को वसूली के आदेश दिए। पिछले चार साल में करीब 15 तारीख लगी। किसान ऐसा मजबूर हुआ कि वह 50 हजार रुपये जमा नहीं कर सका। प्रशासन ने 26 अप्रैल को जमीन की नीलामी की मुनादी कराई। बृहस्पतिवार को नीलामी होनी थी। बोलीदाता के नहीं पहुंचने के कारण जमीन तो बच गई, लेकिन किसान की जिंदगी चली गई। 10 घंटे हंगामा हुआ। जनप्रतिनिधि पहुंचे और आखिरकार देर रात समझौता हो गया। प्रशासन ने भरोसा दिया कि मृतक के परिवार को पांच लाख रुपये किसान दुर्घटना बीमा, तीन लाख रुपये मंडी समिति और दो लाख रुपये की मदद तहसील से की जाएगी। कुछ घंटे पहले ही जो प्रशासन तहसील में बोलीदाता का इंतजार कर रहा था, उसी ने किसान को 10 लाख की आर्थिक सहायता का भरोसा दिया है।
किसान के परिवार को मिले इंसाफ : मलिक
देर रात पूर्व सांसद हरेंद्र मलिक लच्छेड़ा पहुंचे। उन्होंने एसडीएम सदर और सीओ खतौली से बात कर कहा कि किसान के परिवार को इंसाफ मिलना चाहिए।
मुकदमा दर्ज, शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवाया
मंसूरपुर थाने में किसान की मौत का मुकदमा दर्ज किया गया है। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया गया।
चार दिन बाद करने थे बेटी के हाथ पीले
मुजफ्फरनगर। किसान का परिवार गम में डूबा है। चार दिन बाद ही बेटी की शादी होनी थी। इसी वजह से वेद कश्यप खेत के कार्य भी जल्दी जल्दी निपटाना चाहता था। परिजन बताते हैं कि अधिकारियों से कहा था कि कुछ दिन रुक जाएं, लेकिन सुनवाई नहीं हुई। तीन बेटियों में से दो बेटियों की वह शादी कर चुका था। एक बेटी की शादी बघरा क्षेत्र में चार दिन बाद है। घर में शादी की तैयारी चल रही थी।
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