मुजफ्फरनगर। जिला सहकारी बैंक की वार्षिक सामान्य निकाय की बैठक एक राजनैतिक दल का कार्यक्रम बनकर रह गई। संचालकों से न तो चर्चा हुई और न ही कोई सुझाव मांगे गए। उन्हें विचार रखने का मौका भी नहीं मिला। बैठक की गंभीरता पर बुढ़ाना विधायक ने सवाल भी खड़े किए। साथ ही कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने भी संचालकों से सुझाव नहीं लेने पर आपत्ति जताई।
पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे से निर्धारित बैठक केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान के इंतजार में दोपहर करीब सवा बजे शुरू हो सकी। संचालकों को मंच पर जगह दी तो दी गई, लेकिन किसी को बोलने का मौका नहीं मिला। बैंक महाप्रबंधक अशोक वर्धन पाठक ने प्रस्ताव पढ़ने शुरू किए, तो संचालन कर रहे उप सभापति मुकेश जैन ने उन्हें शॉर्ट करा दिया। विधायक उमेश मलिक ने कहा भी वह लगातार दूसरे वर्ष सामान्य निकाय की बैठक में शामिल हो रहे हैं, लेकिन बैठक में कोई गंभीरता नजर नहीं आती। जितनी मेहनत पद पाने के लिए की जाती है, उतनी ही मेहनत दायित्वों को निभाने में की जाए। मेरठ की बैठक का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पर बैंक के विकास को लेकर गंभीरता से चर्चा होती है, जिसका यहां अभाव है। कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने भी संचालकों को बोलने का मौका नहीं दिए जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि बैंक के विकास के लिए अन्य लोगों के सुझाव बेहद जरूरी है।
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मंगलामुखियों ने घेरी मंत्रियों की गाड़ी
डीसीबी की बैठक समाप्त होते ही वहां कई मंगलामुखी पहुंच गए। वे केंद्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान, प्रदेश के कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र चौधरी समेत अन्य नेताओं की गाड़ी के आगे खड़े हो गए। काफी समझाने के बाद भी जब वे नहीं हटे, तो डीसीबी चेयरमैन सत्यपाल पाल ने उन्हें रुपये दिए। इसके बाद ही उन्होंने मंत्रियों को जाने दिया।