श्मशान घाट में जमीन पर भी जगह नहीं बची
मुजफ्फरनगर। जिले में कोरोना महामारी से हालात दिन-प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। दो दिन से श्मशान घाट और कब्रिस्तान में रिकार्ड शव पहुंच गए हैं। श्मशान घाट में चौकी की जगह खत्म होने के बाद नीचे शव रखकर जलाने की जगह भी नहीं बची है। शहर के श्मशान नदी घाट पर 16 शवों का अंतिम संस्कार हुआ, जिनमें छह कोरोना के थे। नई मंडी में जगह नहीं होने के कारण तीन शव वापस करने पड़े।
बृहस्पतिवार को नदी घाट स्थित श्मशान घाट में 16 शवों का अंतिम संस्कार हुआ, इनमें छह शव कोरोना से मृत लोगों के थे। श्मशान घाट में जगह नहीं रहने और सभी चौकियां भरने के बाद शव नीचे जमीन पर रखकर ही अंतिम संस्कार किया गया। परोपकारी सेवा समिति के अध्यक्ष अजय अग्रवाल ने बताया कि श्मशान घाट में 21 अप्रैल को आठ शवों का अंतिम संस्कार हुआ और 22 को 16 की अंतिम क्रिया हुई। इन 16 में छह कोरोना के थे। अब श्मशान घाट में नीचे भी जगह नहीं रही।
नई मंडी श्मशान घाट में जगह नहीं होने के कारण तीन शवों को नदी घाट के श्मशान घाट पर भेजना पड़ा। नई मंडी श्मशान घाट समिति के अध्यक्ष संजय मित्तल ने बताया कि 21 अप्रैल को नई मंडी मोक्षधाम पर 16 शवों का अंतिम संस्कार हुआ। इससे पहले शहर के किसी भी श्मशान घाट में एक दिन में 16 शवों का अंतिम संस्कार नहीं हुआ था। बृहस्पतिवार को सात अंतिम संस्कार हुए इनमें तीन कोरोना के हैं। जगह नहीं होने के कारण तीन शवों का जमीन पर ही अंतिम संस्कार हुआ। तीन शव नदी घाट पर भेजने पड़े।
संजय मित्तल ने बताया कि प्रशासन की ओर से पीपीई किट, मास्क और सैनिटाइजर कर्मचारियों के लिए मिला है। जनकपुरी स्थित श्मशान घाट पर बृहस्पतिवार को दो लोगों का अंतिम संस्कार हुआ। शहर के कब्रिस्तानों में दस शव सुपुर्दे खाक हुए।