शुकतीर्थ गंगा घाट पर आरती करते हुए : फाइल फोटो
मुजफ्फरनगर। अयोध्या और काशी की तरह शुकतीर्थ के गंगा घाट पर संध्याकालीन आरती के आयोजन को लेकर छिड़ा विवाद तूल पकड़ने लगा है। श्री गंगा सेवा समिति और आरती के आयोजकों के बीच तनाव बन गया है। समिति का कहना है कि केवल श्राद्ध पक्ष में गंगा घाट पर आरती अनुष्ठान की अनुमति दी थी। आयोजक अब सूर्यास्त के समय रोज आरती करना चाहते हैं। बुधवार को समिति के पदाधिकारियों ने बैठक बुलाई है। पितृपक्ष में शुकतीर्थ में अलग-अलग धामों, शिवालयों और धार्मिक केंद्रों में भागवत कथा अनुष्ठान सप्ताह आयोजित किए गए। गंगा घाट पर बने कनक भवन में 14 से 21 सितंबर तक श्रीमद्भागवत कथा कराई। संयोजक अंकज भारद्वाज ने भवन के सामने भव्य तरीके से संध्याकालीन आरती भी शुरू करा दी।
काशी और अयोध्या तर्ज पर प्रारंभ हुई आरती को सुनने श्रद्धालु भी जुटने लगे। श्री गंगा सेवा समिति ने बिना सहमति के निजी तौर पर आरती आयोजन को लेकर एसडीएम जानसठ को शिकायत दर्ज कराई थी। मामले को उलझता देख आयोजक अंकुज भारद्वाज ने श्री गंगा सेवा समिति के पदाधिकारियों से बातचीत की। तय किया गया कि 21 सितंबर तक आरती का कार्यक्रम रखेंगे। 22 सितंबर को आरती नहीं हुई लेकिन मंगलवार को फिर आरती शुरू हो गई। संयोजक कनक भवन के सामने आरती आयोजन को स्थायी बनाना चाहते हैं, जबकि श्री गंगा सेवा समिति उनके निर्णय से सहमत नहीं है।
सोशल मीडिया पर किया प्रचार : आयोजन की साज-सजा और निपुण पुरोहितों को आमंत्रित कर आरती प्रोग्राम को दर्शनीय बना दिया गया। सोशल मीडिया पर भी आरती को प्रचारित किया गया। इसके बाद यहां लोग जुटने लगे तो आरती पर विवाद शुरू हो गया।