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Khatauli By-Election: दलितों की चाल, कर देगी बड़ा कमाल, खतौली के दंगल में बन रहा ये नया समीकरण

Tue, 06 Dec 2022 12:46 AM IST
कपिल kapil मदन बालियान, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर

सार

Khatauli By-Election: खतौली उपचुनाव में दलितों की चाल बड़ा कमाल करेगी। जानिए आखिर मतदान के बाद खतौली में क्या नए समीकरण बन रहे हैं।
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खतौली उपचुनाव, khatauli Election - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पिछले पांच साल में भाजपा का सबसे सुरक्षित किला बन गए खतौली के उपचुनाव में भाजपा और सपा-रालोद-आसपा गठबंधन के बीच कांटे का मुकाबला हुआ है। बसपा के चुनाव से बाहर रहने के कारण अनुसूचित जाति के मतदाताओं की चाल ने सियासी समीकरण उलझा दिए हैं। दलितों ने कहीं नल चलाया तो कहीं कमल भी खिलाया। ऐसे में नतीजे चौंकाने वाले और नजदीकी हार-जीत वाले सामने आने का अनुमान लगाया जा रहा है।

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बसपा के उपचुनाव से दूरी बनाने के कारण खतौली विधानसभा के करीब 45 हजार दलित मतदाताओं पर सबकी नजर टिकी थी। सोमवार को मतदान शुरू हुआ तो इसका असर भी नजर आने लगा। मतदाता धीरे-धीरे घर से निकले। बिहारीपुर, गालिबपुर, जंधेड़ी जाटान, मोहिद्दीनपुर में दोनों दलों के बीच मुकाबला बराबरी का नजर आया। दलित-मुस्लिम समीकरण वाले फूलत और सराय रसूलपुर गांव में दोपहर के समय गठबंधन के प्रति रुझान देखने को मिला। बेहड़ा अस्सा और सिखेड़ा में भाजपा और गठबंधन के बीच मुकाबला रहा। 

रतनपुरी क्षेत्र के ठाकुर बाहुल वाले गांवों में दलितों का रुख भाजपा की ओर दिखा। हर गांव के जातीय समीकरणों के हिसाब से दलितों ने मतदान किया है। दिनभर यहां आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष चंद्रशेखर मतदान पर नजर बनाए हुए थे। भाजपा और गठबंधन के नेता दलितों का वोट अपने-अपने पक्ष में पड़ने का दावा कर रहे हैं।
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2017 से यहां अजेय रही है भाजपा 
भाजपा ने 2017 में तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य विक्रम सैनी को उम्मीदवार बनाया तो करीब 31 हजार वोटों से जीत मिली। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भी केंद्रीय मंत्री डॉ. संजीव बालियान की जीत में खतौली की अहम भूमिका रही। इसके बाद 2022 के मुख्य चुनाव में विक्रम सैनी 16 हजार वोटों से जीतकर दूसरी बार विधायक चुने गए थे। लेकिन विधानसभा की सदस्यता चली जाने के कारण यहां उपचुनाव कराया जा रहा है। 

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वहीं इस बार बसपा का उम्मीदवार मैदान में नहीं होने के कारण समीकरण उलझे हैं। विधानसभा के मुख्य चुनाव में दलितों ने बसपा से चुनाव लड़े करतार भड़ाना को वोट दिए थे, हालांकि भाजपा के पक्ष में भी दलितों के वोट गए थे।
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