मुजफ्फरनगर में डॉक्टर बेटे गौरव के साथ मां मीनू।
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पति की मौत के 72 घंटे बाद ड्यूटी पर लौट आई महिला
मुजफ्फरनगर। मां की ममता और दुलार सभी के लिए एक आशीर्वाद के रूप में कामयाबी का मार्ग प्रशस्त करती है। कोरोना संक्रमण काल के दौरान भी देशसेवा के प्रति लोगों का उत्साह काबिले तारीफ है। कोरोना को मात देने के लिए देश का प्रत्येक नागरिक अपने दुख-दर्द को भूल कर दिन रात सेवाभाव से कार्य में जुटा हुआ है। ममता की छांव में बेटे और बेटियों ने ठाना है कि मां के सपने को पूरा करने के लिए कोराना को हराना ही है। मदर्स डे पर पेश है एक रिपोर्ट।
भोपा सीएचसी पर तैनात स्वास्थ्य कर्मी सुनीता सालार भोपा के गांव कादीपुर निवासी हैं। उनके पति इंद्रवीर सिंह पिछले 13 वर्षों से कैंसर की बीमारी से पीड़ित थे। उपचार के दौरान सात अप्रैल को उनकी मौत हो गई। तीन दिन की अवकाश के बाद वह अपनी ड्यूटी पर लौट आई। सुनीता सालार के बेटों विपुल व विशाल का कहना है कि उन्हें पिता की मौत का सदमा है, लेकिन उन्हें अपनी मां पर बड़ा नाज है। मां हमारे बीमार पिता की लंबे समय से देखभाल करती आ रही थीं। उन्होंने अपने फर्ज को भी बखूबी निभाया। पति की मौत के बाद भी मां कोरोना के खिलाफ चल रही जंग में स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान देती रहीं। हमारे पिता की मौत के 72 घंटे बाद ही कोरोना के चलते अपनी ड्यूटी पर लौट जाने पर वह अपनी मां पर गर्व महसूस करते है। उम्मीद हैं कि हम कोरोना को जल्द ही मात देंगे।
चरथावल के गांव कुल्हेड़ी में मां मीनू की आंखें बेटे गौरव से मिलने को तरस रहीं है। डॉक्टर रजनीश त्यागी और गृहिणी मीनू का बेटा लॉकडाउन से पहले चीन के शहर सैन जियांग में फंसा है। मां उसे रोजाना वी-चेट पर ममता और दुलार देती है। बकौल मीनू परदेश में फंसा बेटा आज भी यूट्यूब चैनल से भारत में कोविड-19 से बचाव के लिए जागरूक कर रहा है। मां मीनू बताती है कि आपदा के वक्त वह घर पर रहें, मदर्स डे पर इससे बड़ा कोई तोहफा नहीं हो सकता। मीनू की ममतामयी छांव के लिए बेटा गौरव बेबस और व्याकुल है। बेटा चीन में वर्ष 2019 में एमबीबीएस की पढ़ाई के बाद वहीं मेडिकल संस्था में कोचिंग करता है, लेकिन अब उसे अपने वतन की याद सता रही है।
मां पर बेटो को गर्व : मुजफ्फरनगर जिले के भोपा सीएचसी पर टीकाकरण कार्य की तैयारी में जुटी स्वास्थ?- फोटो : MUZAFFARNAGAR