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मंदिर में शीश नवाने पर पूरी होती है मन की मुराद

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जानसठ में प्राचीन प्रसिद्ध श्री देवी मंदिर - फोटो : KHATAULI
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जानसठ। कस्बे में प्राचीन प्रसिद्ध श्री देवी मंदिर की दूर तक मान्यता है। पूजा-अर्चना के लिए रोजाना श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्रों में रोजाना महिला श्रद्धालु भजन कीर्तन करती हैं। मंदिर में मांगी गई मनोकामना पूरी होती है।
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कस्बे के रहने वाले बुजुर्ग मूलचंद सैनी, राजाराम और राम सिंह बताते हैं कि श्री देवी मंदिर का शिलान्यास 1972 में डीएवी इंटर कॉलेज के तत्कालीन प्रधानाचार्य महावीर प्रसाद ने किया था। मंदिर का उद्घाटन 1973 में स्वामी कल्याण देव महाराज ने किया था। धीरे-धीरे मंदिर की मान्यता दूर तक फैल गई और यहां पर श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के लिए आने लगे। उस दौरान कस्बे में मात्र श्री देवी मंदिर ही एक प्रसिद्ध मंदिर हुआ करता था। श्रद्धालुओं द्वारा मांगी गई मन्नतें पूर्ण होती है। आसपास के जिलों के श्रद्धालु मंदिर में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर मन की मुराद मांगते हैं।
श्री देवी मंदिर के पंडित जी लक्ष्मी प्रसाद शास्त्री ने बताया कि वे वर्ष 1993 से मंदिर में लगातार पूजा अर्चना करते हुए आ रहे हैं। मंदिर में मां भगवती की जो कोई भी श्रद्धालु पूजा-अर्चना करता है। उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। मंदिर में भक्त दूरदराज से पूजा अर्चना करने आते हैं।
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आस्था का केंद्र है घासीपुरा का मां दुर्गा का मंदिर
मंसूरपुर। नेशनल हाईवे पर घासीपुरा का दुर्गा मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। दुर्गा मंदिर कमेटी के अध्यक्ष कुंवर विजय राज सिंह ने बताया कि माता दुर्गा मंदिर की स्थापना उनकी दादी कंवर गिरिराज ने सन 1934 में कराई थी। हर वर्ष चौदस के अवसर पर हाईवे के किनारे बाग में यहां चार दिवसीय भव्य दुर्गा मेले का आयोजन होता है। मेले में तीन दिवसीय प्रसिद्ध दंगल भी होता है। श्रद्धालु नरेंद्र कश्यप, नंदकिशोर, सुंदरपाल, अरुण सैनी, खुशी आदि का कहना है कि जो श्रद्धालु सच्चे मन से माता से मन्नत मांगता है। माता उसकी मन्नतें अवश्य ही पूरी करती है। संवाद
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