मुजफ्फरनगर में जिला कारागार में पिछले दिनों छापे के दौरान मिले 22 मोबाइल फर्जी आईडी पर चल रहे थे। इनमें अधिकांश ऐसे लोगों की आईडी मिली हैं, जो कई सालों पूर्व स्वर्ग सिधार चुके हैं।
कई कंपनियों के डीलर और कर्मचारियों की भी मिलीभगत सामने आई है। माना जा रहा है कि मामले में कंपनी कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी। जल्द ही पुलिस पूरे मामले का खुलासा करेगी।
जेल में गत 22 फरवरी को डीएम और एसएसपी ने भारी फोर्स के साथ छापा मारा था। कार्रवाई के दौरान पुलिस को वहां से 22 फोन और दर्जनों सिम मिले थे। मामले की जांच एसपी सिटी संतोष कुमार मिश्रा को सौंपी गई थी।
सर्विलांस की टीम के माध्यम से पुलिस उसी दिन से पकड़े गए मोबाइल फोन की जांच में जुटी हुई थी। अभी तक की जांच में पुलिस ने कारागार में फोन चलने की सिर्फ दस दिनों की जांच की है।
सूत्रों की माने तो इन दस दिनों में ही हजारों कॉल होने की जानकारी सामने आई है। जिन सिमों पर बातें हुई हैं, अधिकतर फर्जी आईडी पर हैं। उनकी जांच पड़ताल में पता चला कि संबंधित व्यक्ति की या तो मौत हो चुकी है या फिर वह कहीं बाहर रहते हैं।
कुछ फोनों की जांच में पता चला कि एक-एक फोन पर कई-कई सिम इस्तेमाल होते थे। बैरक के भीतर एक ही मोबाइल पर अलग-अलग बंदी अपने सिम बारी-बारी से डालकर फोन चलाते थे।
चेकिंग के दौरान सिम निकालकर छुपा लिए जाते थे और खाली फोन चेकिंग के दौरान पकड़ा जाता था। एक ही मॉडल के फोन मिलने का कारण ज्यादा बैट्री बैकअप की क्षमता बताया गया है। पकड़े गए मोबाइल की बैट्री क्षमता काफी ज्यादा होने के कारण वह बंदियों का पसंदीदा मॉडल था। जांच के दौरान प्रकाश में आए सभी लोगों के खिलाफ पुलिस मुकदमे दर्ज करने की तैयारी में जुटी है।