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अपहरण की कहानी बदली, वीडियो बनी अभी भी फांस

Sat, 04 Aug 2018 12:37 AM IST
मुजफ्फरनगर/अमर उजाला/ब्यूरो
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jain munni matter - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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मुजफ्फरनगर। छात्रा के अपहरण की कहानी बदल गई है। हरिद्वार पुलिस के सामने छात्रा ने परिजनों की कहानी को झुठला दिया है। अब सवाल वायरल वीडियो का है। इससे जुड़े कई सवाल हैं, जिनका जवाब मिलना बाकी है। छात्रा भी इसकी सच्चाई सामने आने तक अपनी जान को खतरा बता रही है।
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मामले को लेकर दो धड़े में बंटे जैन समाज में एक धड़ा वीडियो की सच्चाई पर सवाल उठा रहा है और इसमें छेड़छाड़ का संभावना जता रहा तो दूसरा वीडियो के आधार पर कार्रवाई की मांग कर रहा है।

जैन मुनि का नैतिक आचरण भी सवालों के घेरे में है तो एक सवाल यह है कि वीडियो वायरल करने के लिए 39 दिन का इंतजार क्यों किया गया। ऐसे में कौन वीडियो का राजदार है, जिसने 23 और 24 जून को वहलना प्रवास में बनी जैन मुनि की वीडियो की क्लिप सीडीआर से निकाल तैयार कराई।मामला सोशल मीडिया में फ्लैश होने के बाद चंडीगढ़ में चातुर्मास कर रहे जैन मुनि नयन सागर ने खुद अपने बयान में यह सवाल उठाया कि आखिर 39 दिन तक वीडियो को वायरल करने का क्यों इंतजार किया गया। इस षड्यंत्र और साजिश के पीछे कोई न कोई है।
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वायरल वीडियो को सीडीआर से उसी वक्त निकालना और एडिटिंग कर क्लिप बनवाना भी उनके इशारे को पुष्ट करता है। प्रबंध समिति साफ कर चुकी है कि छह दिन के बाद की वीडियो सीडीआर में सेव नहीं रहती। कोई तो राजदार है जिसकी छात्रा और जैन मुनि पर नजर थी। यही वजह है कि संदिग्ध गतिविधियां कैमरे में कैद होते ही उन्हें सीडीआर से निकाल लिया गया। 25 जून की सुबह जैन मुनि नयन सागर ने वहलना से विहार किया था।

जिसके हाथों में यह वीडियो क्लिप थी, क्या वह शख्स प्रबंध समिति से ही जुड़ा है या कोई और है? उसने यह राज किस-किस से शेयर किया और कैसे वीडियो क्लिप मलयेशिया पहुंच गई। इतने दिनों तक पर्दे के पीछे कोई बातचीत तो नहीं चल रही थी, जिसमें बात नहीं बनने पर वीडियो वायरल कर दी गई। पूरे प्रकरण में वीडियो में शामिल छात्रा का रिमोट कंट्रोल किसी और के हाथ मेें तो नहीं है? अपहरण मामले में जैन मुनि को छात्रा से क्लीन चिट मिल गई, मगर वीडियो वायरल प्रकरण मामले में अभी ऐसे कई सवाल है, जिनका जवाब मिलना बाकी है।

पहले से तैयार हो रही थी पेश होने की भूमिका
मुजफ्फरनगर। हरिद्वार में दर्ज अपहरण मामले में छात्रा का बहादराबाद थाने में पहुंचना कोई अचंभा नहीं है, क्योंकि पर्दे के पीछे पहले से यह प्लान तैयार हो गया था। अंदरूनी रुप से मामले से जुड़े लोग जानते थे कि लापता छात्रा कहां है। जैन मुनि के पैराकारों ने मामले को तूल पकड़ता देख और मुकदमे को खत्म कराने के उद्देश्य से उक्त छात्रा को अकेले ही थाने भेजने की भूमिका बना दी थी। छात्रा अकेली आई, मगर उसे पीछे से बैकअप दिया जा रहा था। तभी वह बेबाकी से आई और बयान देकर चली गई। दर्ज मुकदमे का हो-हल्ला उसने झटके में खत्म कर दिया।

लापता होते ही करा दी थी मुनि की नामजदगी
मुजफ्फरनगर। जैन मुनि नयन सागर महाराज से छात्रा के परिवार की काफी नजदीकी रही है। छात्रा भी  उनके प्रवास के दौरान उनके कार्यक्रमों आती जाती रही है। वायरल वीडियो से भी जाहिर है कि यह उनकी पहले से मुलाकात रही है।  वीडियो में कमरे से झांकने का दृश्य हो या फिर गैलरी में छात्रा के बेबाक अंदाज में टहलने का तरीका। तीसरी वीडियो क्लिप में जिसमें जैन मुनि नयन सागर  छात्रा को कमरे में जाने का हाथ से इशारा करते है। वह भी तेज कदमों से कमरे में चली जाती है और कुछ मिनट बाद गैलरी में बैठे जैन मुनि भी उसी कमरे में दाखिल हो जाते है। छात्रा के परिजनों की भी इसकी भनक थी, तभी तो छात्रा के लापता होते ही जैन मुनि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई। 
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