पांच मुहर्रम के जुलूस के दौरान खालापार में सीनाजनी करते शिया सोगवार। स्रोत-स्वयं।
मुजफ्फरनगर। या हुसैन, या हुसैन की सदाओं के साथ शहर में पांच मोहर्रम का जुलूस निकाला गया। शिया सोगवारों ने सीनाजनी की। जुलूस में ज़ुलजुना (इमाम का घोड़ा) बरामद हुआ। इमाम हुसैन की शहादत का जिक्र सुन शिया समाज के लोग ज़ार-ज़ार रोए। जायरीन जुलूस में आगे-आगे अलम और ताजिया लेकर चले।
बल्लन मियां-अच्छन मियां के अजाखाने पर मजलिस हुई। मिम्बर-ए-रसूल से मौलाना गौहर अब्बास जैदी ने अहलेबैत का मर्तबा बयान किया। कहा कि अब से 1400 साल पहले कर्बला के मैदान में इमाम हुसैन ने अपने नाना के दीन को बचाने के लिए राहे खुदा में शहादत पेश की थी। मर्सियाख्वानी नुसरत जैदी ने की। मजलिस के बाद जुलूस बरामद हुआ। जुलूस मोहल्ला गढ़ी गोरवान होते हुए शहर के मुख्य रास्तों से खालापार में इमामबारगाह आरफीयान पहुंचा।
जुलूस के दौरान जुलजनाह की जियारत कर शिया सोगवार जार-जार रोए। समाज के लोग जुलूस में नोहाख्वानी और सीनाजनी करते हुए आगे बढ़े। जफर आरफी, सोनू जैदी, निहाल जैदी ने नोहाख्वानी की। लारेब, अस्करी, कल्बे हसनैन, नजमुल हसन आदि शामिल रहे।