सठेड़ी के स्कूल की दीवार पर लिखा जीर्ण शीर्ण भवन। संवाद
बुढ़ाना। बच्चे देश का स्वर्णिम भविष्य होते हैं। उनकी शिक्षा, स्वास्थ्य और सुरक्षा की जिम्मेदारी समाज और शिक्षकों के कंधों पर होती है। लेकिन प्राथमिक विद्यालय सठेड़ी का जर्जर भवन बच्चों और शिक्षकों के लिए खतरा बन गया है। नीलामी की रकम पर बात नहीं बनी। दीवार पर जीर्ण-शीर्ण लिखकर पल्ला झाड़ लिया गया है।
ग्राम प्रधान शिवकांत बताते हैं कि स्कूल की इमारत 1986 में बनी थी। दावा किया कि भवन बनने के बाद कभी मरम्मत तक नहीं हुई। दीवारें दरक रही हैं। बरसात में स्कूल परिसर के अलावा छत पर पानी भर जाता है। दीवार और छत से प्लास्टर उखड़ा हुआ है। स्कूल में चार कमरे बने हुए हैं। दो कमरे और एक बरामदा एक साथ और दो कमरे अलग हैं। एक कमरे में आंगनबाड़ी केंद्र खोला गया है।
भवन जर्जर हुआ तो एहतियात के तौर पर सबसे सुरक्षित कमरे में बच्चों को बैठाकर पढ़ाया जाता है। कमरे आसपास ही होने के कारण हादसे का खतरा रहता है।
प्रधान कहते हैं कि पिछले ढाई साल से अधिकारियों को लिखकर दे रहे हैं, लेकिन कोई समाधान नहीं निकाला गया। पूर्व प्रधान विदुर मोहन का कहना है कि विद्यालय इमारत के निर्माण में लापरवाही होने के कारण यह लापरवाही एक दिन बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकती है।
सठेड़ी के स्कूल की दीवार पर लिखा जीर्ण शीर्ण भवन। संवाद
सठेड़ी के स्कूल की दीवार पर लिखा जीर्ण शीर्ण भवन। संवाद
सठेड़ी के स्कूल की दीवार पर लिखा जीर्ण शीर्ण भवन। संवाद