तकनीक से जुड़कर निखरेगी माटी कला
मुजफ्फरनगर। परंपरागत रूप से चली आ रही माटी कला को अब तकनीक से जोड़ा जाएगा। मिट्टी के बर्तन बनाने वाले कुम्हारों को अपना जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए प्रशिक्षण के साथ ही ऋण भी मुहैया कराया जाएगा। ऋण से वे इलेक्ट्रिक चाक, मिट्टी गूथने की मशीन और बर्तन पकाने की आधुनिक भट्ठी का निर्माण करा सकेंगे। जनवरी माह से शुरू हुई योजना में फिलहाल 14 कुम्हारों ने आवेदन किया है।
संकट के दौर से गुजर रही मिट्टी के बर्तन बनाने की कला को संजीवनी देने के लिए प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री माटी कला रोजगार योजना की शुरुआत की है। परंपरागत रूप से इस कार्य को कर रहे कुम्हारों को दस लाख रुपये तक का ऋण दिया जाएगा। जिसमें 25 प्रतिशत सब्सिडी सरकार देगी। खादी ग्रामोद्योग के माध्यम से संचालित इस योजना में 14 लोगों ने आवेदन किया है, जिन्हें बैंकों को भेज दिया गया है। ऋण से कुम्हार विभिन्न प्रकार के बर्तन बनाने के सांचे, मिट्टी गूथने की मशीन खरीद सकेंगे। इससे उन्हें कम मेहनत करनी होगी और उनकी आय भी बढ़ेगी। बर्तन पकाने के लिए आधुनिक भट्ठी बना सकते हैं। इसमें कम ईंधन लगता है तथा प्रदूषण भी कम होता है।
सरकार निशुल्क भी देगी इलेक्ट्रिक चाक
परंपरागत रूप से माटी कला से जुड़े कुम्हारों को सरकार निशुल्क भी इलेक्ट्रिक चाक देगी। जिले में 346 कुम्हारों को चिह्नित किया गया है जो मिट्टी के बर्तन बनाने का काम करते हैं। इसके अतिरिक्त माटी कला से जुड़े लोगों को मिट्टी के लिए निशुल्क पट्टे भी दिलाए जाएंगे।
प्रशिक्षण से सुधरेगा हुनर
जिला खादी ग्रामोद्योग अधिकारी एसएल अग्रवाल ने बताया कि माटी कला से जुड़े लोगों को विभाग की ओर से प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। वर्तमान में मिट्टी के कुकर, तवे एवं अन्य विभिन्न प्रकार के बर्तनों की काफी डिमांड है। कई जिलों में कुम्हार इस तरह के बर्तन बना रहे हैं। जिले के कुम्हारों की आय में बढ़ोतरी के लिए उन्हें तकनीकी प्रशिक्षण दिया जाएगा।