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संगीत के रियाज से मिली मन को शांति

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गांधी कालोनी में हारमोनियम और तबले पर रियाज करते छात्र। - फोटो : MUZAFFARNAGAR
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मुजफ्फरनगर। लॉकडाउन के दौरान घरों में कैद रहने से मन विचलित हो जाता है। एक वक्त में स्थिति ऐसी आती है, न चाहते हुए भी ऊबने लगते हैं। जिंदगी को खुशनुमा, चिंतामुक्त बनाने में संगीत से जुड़ना कारगर साबित हुआ है। म्यूजिक के शौकीन लॉक डाउन की चुनौती को सहजता से निभा रहे हैं। खासकर गीत-संगीत से जुड़े विद्यार्थियों ने इस स्थिति से निपटने को रियाज का अभ्यास बखूबी किया। किसी ने शास्त्रीय गान तो किसी ने राग की विधियों पर निखारा। वीडियो कॉलिंग तथा व्हाट्सएप ग्रुप के जरिये छात्र-छात्राओं ने घरों में स्वयं की संगीत की संगत में पूरी निष्ठा से जोड़ लिया है।
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गांधी कालोनी में केंद्रीय विद्यालय के छात्रों निलेष ने तबले पर महारथ पाई, वहीं विशेष ने हारमोनियम पर लगातार अभ्यास किया। देवपुरम में देवांश मलिक, नई मंडी में समक्ष संगल तथा दिव्यांग संगीता यादव ने गायन और शास्त्रीय संगीत में नित्य रियाज किया। साकेत कालोनी की नचिकेता शर्मा ने लॉकडाउन में तबले पर वक्त बिताया। आदेश कालोनी के प्रणव दीक्षित और अनुज गौतम भी लगातार अभ्यास में जुटे हैं। एसएफ डीएवी पब्लिक स्कूल शाकुंतलम की म्यूजिक शिक्षिका आरती पाल कहती है कि लॉकडाउन में खुश रहने के लिए गीत एवं संगीत खास मायने रखता है। बच्चों ने घरों में रहते निरंतर अभ्यास किया। कोरोना की खबरों को लेकर विचलित नहीं हुए। नियमों का पालन कर संगीत से जुड़कर सब तनाव मुक्त रहे। पियानो, बांसुरी पर भी विद्यार्थी खूब समय बिता रहे हैं।
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संगीत से रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि : दिलीप
मुजफ्फरनगर। संगीत का अभ्यास करने से हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती हैं। शहर के वरिष्ठ संगीतज्ञ पंडित दिलीप मिश्रा बताते है कि संगीत अनेक रोगों के निदान में भी लाभकारी है, जैसे- हृदय रोग, रक्तचाप, अनिद्रा, अवसाद, थायराइड, घबराहट, बेचैनी, तंत्रिका-तंत्र से संबंधित रोग, गले से संबंधित रोग, उत्साह की कमी एवं एकाग्रता को भी बढ़ाता है। गायन के अभ्यास से हमारा श्वसनतंत्र अच्छा से काम करता हैं, जिससे हमारे फेफड़े मजबूत होते हैं, तथा ऑक्सीजन भरपूर मात्रा में हमारे शरीर में प्रवाहित होती हैं, इसके फलस्वरूप हमारे अंदर उत्साह का संचार होता है। हम शांति एवं आनंद का अनुभव करते हैं। यह कई शोध से प्रमाणित हो चुका है, इसके साथ योग एवं प्राणायाम करने से यह और प्रभावी हो जाता है।

संगीतज्ञ पंड़ित दिलीप मिश्रा।- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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