जिला अस्पताल में मौजूद आवारा कुत्ते। संवाद
मुजफ्फरनगर। शहर को नगर निगम बनाए जाने की कवायद चल रही है, लेकिन नागरिक आवारा कुत्तो की बढ़ती संख्या से परेशान हैं। गली-मोहल्लों में घूम रहे आवारा कुत्ते बड़े, बुजुर्ग और बच्चों को आए दिन निशाना बना रहे हैं। कुत्तो की संख्या पर अंकुश के लिए डॉग शेल्टर होम की स्थापना में फिलहाल पालिका नाकाम है। इनकी बढ़ी संख्या पर नियंत्रण के लिए एनजीओ की सहायता लेने का निर्णय लिया गया है। एनजीओ के माध्यम से नगर पालिका आवारा कुत्तो की नसबंदी कराएगी।
शहर से सटे 11 गांव नगर पालिका क्षेत्र में शामिल कर लिये गए थे। विस्तारित क्षेत्र में अभी तक सुविधाओं का अभाव है। ये क्षेत्र पेयजल सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से संतृप्त नहीं हो पा रहे। जबकि आवारा कुत्ते और उत्पाती बंदरों से स्थानीय नागरिक परेशान हैं। सुप्रीम कोर्ट की नई गाइडलाइन के तहत आवारा कुत्तो पर अंकुश के लिए शहर में डॉग शेल्टर होम की स्थापना का खाका खींचा गया था।
वहलना के मीरापुर इलाके में जगह तलाशी गई लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के चलते नगर पालिका को कदम वापस खींचने पड़े। इसके पश्चात डॉग शेल्टर होम के लिए चरथावल रोड पर काली नदी के समीप जगह ढूंढ़ी जा रही है।
पालिका ईओ ने बताया कि डॉग शेल्टर होम स्थापना के साथ पालिका आवारा कुत्तो की नसबंदी कराने का कार्यक्रम बना रही है। इसके लिए एसी एनजीओ से अनुबंध किये जाने की तैयारी है, जिनके पास आवश्यक पशु चिकित्सक सहित अन्य संसाधन मुहैया हों। nशहर की गलियों से निकलना हो रहा मुश्किल : खालापार निवासी जीशान कुरैशी का कहना है कि शहर की प्रत्येक गली में आवारा कुत्तों का आतंक है। कहीं से गुजरते, किसी भी समय पीछे से आवारा कुत्ता काट ले कहा नहीं जा सकता। आवारा कुत्तों की दहशत है। nआवारा कुत्तों पर अंकुश लगना बहुत जरूरी : हरिवृंदावन सिटी के सुरक्षा गार्ड राजपाल का कहना है कि कॉलोनी में आवारा कुत्तों का आतंक है। अक्सर अंजान लोगों पर हमला करते हैं। आवारा कुत्तों पर अंकुश लगना जरूरी है।