सर्द हवाओं और तापमान के उतार-चढ़ाव से मौसम भी बेपटरी हो गया है। सीजन में रविवार रात सबसे ठंडी रही है। रविवार की रात सीजन की सबसे ठंडी रात रिकार्ड की गई है। न्यूनतम तापमान 1.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया है। वहीं, दिन में कड़ी धूप में पसीने छूट रहे हैं। इससे बीमारियों के बढ़ने का खतरा अधिक है।
पहाड़ों पर बर्फबारी के कारण ठंडी हवाओं ने मैदानी क्षेत्रों में कंपकंपी बढ़ा दी है। रविवार की रात सबसे अधिक ठंड रही है। अभी तक न्यूनतम तापमान 2.4 तक रिकार्ड किया गया था। ठंडी हवाओं के असर से रात को पाला पड़ रहा है।
पाले के कारण रविवार की रात सीजन की सबसे ठंडी रही है। रविवार को 1.6 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम रिकार्ड हुआ है। पाला पड़ने से सेहत के लिए भी खतरा है। उधर, दिन में तेज धूप निकलने से पसीना निकल रहा है।
जबकि शाम को शीतलहर से जीना मुहाल है। गर्म और ठंडा मौसम के कारण कई बीमारियों के पैदा होने खतरा बढ़ गया है। सहायक मौसम वैज्ञानिक पान सिंह ने बताया कि सर्द हवाओं का शाम को थम रहा है।
सोमवार को बसंत पंचमी का पर्व रहा है। इस दिन से मौसम में गर्माहट बढ़ने लगती है. जिसके चलते तापमान में भी बदलाव महसूस होना शुरू होता है।फरवरी के पहले सप्ताह से ही रात और दिन के तापमान में अंतर होना प्रारंभ हो जाएगा। हालांकि अभी दो से तीन दिन सुबह और शाम को सर्द हवाएं चलेंगी।
प्रदूषण की मात्रा भी बढ़ेगी
मुजफ्फरनगर। जिला अस्पताल के चिकित्सक डॉ वाई तिरखा ने बताया कि मौसम में गर्माहट होने से प्रदूषण भी बढ़ेगा, क्योंकि ठंड में प्रदूषण जमीन पर बैठ जाता है। जिसका असर सांस, दिल और फेफड़ों के रोगियों के घातक है।
अब दिन गर्म होने चलते प्रदूषण आसमान की उठना शुरू करेगा। जिसकी चपेट में आने से पेट में इंफेक्शन, वायरल, बुखार के रोग में भी इजाफा होगा। सीजनल बीमारियों से पीड़ित लोग अधिक पहुंच रहे हैं। जिनमें गला, बुखार के अधिक है।
गेहूं की पैदावार होगी अच्छी
मुजफ्फरनगर। सहायक मौसम वैज्ञानिक पान सिंह ने बताया कि ठंड पड़ने से गेहूं की फसल के लिए अच्छा है। जितनी अधिक ठंड होगी गेहूं उतना ही दानेदार रहेगा। हालांकि आलू, सरसों और अन्य कई फसलों के लिए पाला घातक है।