न्यूरो सर्जरी में नया मुकाम हासिल करने वाले डॉ. सुधीर त्यागी ने निष्क्रिय ब्रेन को कंप्यूटराइज्ड चिप के सहारे सक्रिय कर कई रोगियों को जीने की उम्मीद दी है। उनका कहना है कि डिप्रेशन देश की सबसे खतरनाक बीमारी है। उन्होंने बच्चों को मानसिक दबाव से मुक्त कर प्रोत्साहित करने का संदेश दिया।
चरथावल में पूर्व सभासद कुबेरदत्त त्यागी के आवास पर अपोलो हॉस्पिटल में न्यूरो सर्जरी विभाग के हैड डॉ. सुधीर त्यागी ने अमर उजाला से खास बातचीत की। डी-ब्रेन स्टीमोशन सर्जरी में उनकी शानदार पकड़ है। उन्होंने बताया कि न्यूरो सर्जरी में डिजीटल क्रांति आई है।
हाथ और पैर निष्क्रिय हो जाने के बाद ब्रेन में सर्जरी कर कंप्यूटराइज्ड चिप लगाई जाती है, जिसके माध्यम से मरीज चलने-फिरने की स्थिति में आ जाता है। कहा कि डिप्रेशन 21वीं सदी की सबसे खतरनाक बीमारी है। भागदौड़ की जिंदगी में प्रतिस्पर्धा का दबाव बढ़ गया है। जिस वजह से बच्चे अपनी नैसर्गिक प्रतिभा का खो रहे हैं।
पढ़ाई में बेहतर करने के लिए अभिभावक बच्चों की पिटाई और डांट से बचेें। अच्छे मोटिवेशन से बच्चा ज्यादा बेहतर परिणाम दे सकता है। सिर्फ पढ़ाई में ही उज्ज्वल भविष्य नहीं देखना चाहिए। बच्चों में जैसी प्रतिभा है, उसे उसी दिशा में निखारें। अवसाद से भावी पीढ़ी को बचाना होगा।
दिल्ली आईएमए के अध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे डॉक्टर त्यागी ने कहा कि स्वयं की जागरूकता से कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों को भी शिकस्त दी जा सकती है। विदेशी रोगियों में भारत में न्यूरो सर्जरी कराने का भरोसा बढ़ गया है। श्रीलंका, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, नेपाल, थाईलैंड, मलेशिया आदि देशों से रोगियों की देश में तादात बढ़ी है।
सोहजनी तगान में जन्में डॉ. त्यागी
चरथावल। किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज लखनऊ से 1988 में एमबीबीएस के बाद डॉक्टर त्यागी ने वहीं से 1992 में एमएस किया। न्यूरो सर्जरी में उन्होंने एम्स दिल्ली और सिडनी आस्ट्रेलिया से विशेष डिग्री हासिल की। मंसूरपुर क्षेत्र के गांव सोहजनी तगान में किसान बाबूराम और मां शिक्षा देवी के घर में जन्मे डॉक्टर त्यागी की शिक्षा गांव के प्राथमिक विद्यालय और मुजफ्फरनगर शहर में हुई है।