यज्ञ में आहुति देते आर्य समाज के लोग।
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आर्य समाज नईमंडी का तीन दिवसीय वार्षिकोत्सव वेद की ज्योति जलती रही, ओइम का झंडा ऊंचा रहे के उद्घोष के साथ पूर्ण हुआ। परोपकारिणी सभा अजमेर से आए डॉ वेदपाल आर्य ने कहा कि मन, वचन और कर्म से जीवन में शुद्धता आएगी, तभी समाज में अच्छाइयों की स्थापना होगी।
नईमंडी के वकील रोड स्थित आर्य समाज भवन में 89वां वार्षिकोत्सव के समापन समारोह में मुख्य वक्ता डॉ आर्य ने कहा कि वैदिक साहित्य जीवन को सद्मार्ग का अनुगामी बनाता है। बुराइयों को त्यागने और अच्छाइयों को ग्रहण करने के लिए तत्पर रहें। स्वामी सत्यवेश सरस्वती ने अंधविश्वास, पाखंड और कुरीतियों के विरुद्ध अलख जगाकर युवा पीढ़ी को सत्य का ज्ञान कराने की अपील की। संस्कार चेतना अभियान के संचालक आचार्य गुरुदत्त आर्य ने कहा कि कथनी-करनी के फर्क को मिटाएं, तभी समाज में सत्य और न्याय स्थापित होगा।
स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती, स्वामी योगानंद सरस्वती, स्वामी आत्मानंद सरस्वती, महात्मा सत्यमुनि, महात्मा प्रेम मुनि, बहन शांति शर्मा ने भी विचार व्यक्त किए। भजनोपदेशक रविंद्र आर्य ने स्वतंत्रता संग्राम में शहीदों और क्रांतिकारियों के बलिदान की गाथा सुनाई। अध्यक्षता आचार्य गुरुदत्त आर्य और संचालन आरपी शर्मा ने किया। मास्टर विजय सिंह, देवी सिंह सिंभालका, राजपाल सिंह चाहल, आनंदपाल सिंह आर्य, गुलबीर सिंह आर्य, वीरेंद्र सिंह आर्य, डॉ. नरेश कुमार आर्य, सुमन अग्रवाल, आदेश अग्रवाल, दयावती शर्मा आदि मौजूद रहे।