रसोई के बजट पर नहीं गया महिला वित्तमंत्री का ध्यान
मुजफ्फरनगर। महिला वित्तमंत्री ने महिलाओं की रसोई के बजट को ध्यान में नहीं रखा है। खाद्य पदार्थों की महंगाई को कम करने के लिए सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा। महिला हित की योजनाओं के लिए बजट निर्धारण करना तो ठीक है, लेकिन महिला सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए सिस्टम को विकसित करने की ओर भी ध्यान नहीं दिया गया। नई मंडी स्थित अपने आवास पर रसोई में काम करते हुए रक्षंधा ने कहा कि महिलाओं का ध्यान तो केवल घरेलू बजट पर रहता है। इसे लेकर कोई राहत नहीं दी गई है।
- खाद्य पदार्थ बहुत महंगे हैं। सब्जी, फल एवं दालों को खरीदने की हिम्मत नहीं होती। वित्तमंत्री महिला हैं, लेकिन उन्होंने रसोई के बजट का ध्यान नहीं रखा है।
- अंजलि, गृहिणी।
- महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं के लिए 28,600 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित करना अच्छा है, लेकिन महिला सुरक्षा के कार्यों को स्पष्ट नहीं किया गया है।
- अदिति भारद्वाज, गृहिणी।
- यह तो माना गया है कि बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना का अच्छा असर हुआ है, लेकिन बालिका शिक्षा को लेकर कोई छूट देने की साफ तौर पर घोषणा बजट में नहीं दिखी।
- शिल्पी मित्तल, गृहिणी।
- महिलाओं को लेकर बजट के जो अंश हैं, वे सब गोलमोल हैं। किस योजना में क्या दिया गया है, महंगाई कम करने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, इसे स्पष्ट नहीं किया गया।
- नेहा बालियान, गृहिणी।
- महिलाओं को रसोई का बजट सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। एलपीजी और घरेलू उपयोग की वस्तुओं के दाम बेतहाशा बढ़े हुए हैं। इन्हें कम करने के लिए कोई घोषणा नहीं की गई है।
- विनोद रानी मित्तल, गृहिणी।
- महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने, उन्हें रोजगार देने के लिए घोषणाओं का अभाव है। लोगों को अच्छा स्वास्थ्य देने के लिए चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाने एवं घरेलू खर्च को कम करने की जरूरत थी।
- बबीता, गृहिणी।