भौराकलां में वट सावित्री व्रत पर सास को बायना देती महिला।
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मोरना। वट सावित्री पर्व पर शुकतीर्थ स्थित शुकदेव आश्रम के कपाट बंद रहे। जिसके चलते श्रद्धालु प्राचीन वट वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना नहीं कर पाए और केवल गंगा स्नान कर वापस लौट गए। गंगा घाट व आश्रम पर भारी पुलिस बल तैनात रहा।
तीर्थ नगरी शुकतीर्थ में बृहस्पतिवार को वट सावित्री पर्व कोरोना महामारी के चलते नहीं मनाया गया है। शुकदेव आश्रम के कपाट बंद रहे। स्वामी ओमानंद जी महाराज ने सभी श्रद्धालुओं को घर पर ही पूजा अर्चना करने का अनुरोध किया था। महाभारत कालीन प्राचीन वटवृक्ष करीब 5000 वर्ष पुराना है। बृहस्पतिवार को काफी संख्या में पहुंचे श्रद्धालु कोरोना गाइडलाइन के चलते वट वृक्ष के नीचे पूजा अर्चना नहीं कर पाए। श्रद्धालुओं ने गंगा घाट पर स्नान कर पूजा अर्चना की और वापस लौट गए। शुकतीर्थ के प्रसिद्ध कथा वाचक अचल कृष्ण शास्त्री ने बताया कि वट सावित्री पर्व सुहागन स्त्रियों की साधना का पर्व है। इस पर्व पर सुहागिन स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु और समृद्धि के लिए वट वृक्ष की पूजा अर्चना करती है। इस दौरान शुकतीर्थ में एसडीएम जानसठ जनेंद्र कुमार, सीओ गिरजा शंकर त्रिपाठी सहित पुलिस बल मौजूद रहा।