बैंक फूंकने के आरोपियों की जमानत अर्जी नामंजूर
मुजफ्फरनगर। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में 20 दिसंबर को हुए उपद्रव के दौरान शहर के मेरठ रोड स्थित देना बैंक में आगजनी के मामले में एडीजे कोर्ट ने जेल में बंद तीन आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। आगजनी में बैंक के बाहर खड़े वाहन, बिजली मीटर व एसी जलकर नष्ट हो गए थे।
सीएए के विरोध में हुए उपद्रव के दौरान शहर के मीनाक्षी चौक की तरफ से आए उपद्रवियों ने मेरठ रोड स्थित देना बैंक में भी जमकर आगजनी कर दी थी। आगजनी में बैंक के बाहर खड़ी दो बाइक व दो एक्टिवा पूरी तरह जलकर नष्ट हो गए थे। वहीं, बैंक का बिजली का मीटर और तीन एसी भी आग की लपटों की भेंट चढ़ गए थे। उपद्रवियों ने बैंक के अंदर भी आगजनी का प्रयास किया था, जिसे कर्मचारियों ने मुख्य गेट बंद कर बमुश्किल विफल किया था। बैंक शाखा प्रबंधक सुमित खारी ने बैंक में आगजनी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसमें कई सफेदपोश भी नामजद किए गए थे। मामले में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कई उपद्रवियों को चिह्नित कर जेल भेजा था, जिनमें से मोहल्ला खालापार निवासी सत्तार, दिलशाद परचूनिया व शहजाद अभी भी जेल में बंद हैं। उक्त तीनों आरोपियों ने एडीजे प्रथम वीर नायक सिंह के समक्ष जमानत अर्जी दाखिल की थी। एडीजीसी जितेंद्र त्यागी ने बताया कि जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद न्यायाधीश ने तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
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नामजद सफेदपोश पुलिस की पकड़ से दूर
मुजफ्फरनगर। सीएए उपद्रव के दौरान देना बैंक में हुई आगजनी के मामले में कई सफेदपोश भी नामजद किए गए थे, जो पुलिस द्वारा दर्ज कराए गए मुख्य मुकदमे में भी नामजद हैं। वे अभी तक पुलिस की गिरफ्त से दूर हैं।