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Muzaffarnagar News: 98 हजार से घटकर चार हजार मन रह गई गुड़ की आवक

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मुजफ्फरनगर। जनपद में सैकड़ों से अधिक कोल्हू संचालित हो रहे हैं। बावजूद मंडी में गुड़ की आवक घटती जा रही है। व्यापारियों ने माफिया की सक्रियता का आरोप लगाते हुए कोल्हुओं से ही गुड़ की सप्लाई की बात कही। व्यापारियों का कहना है कि नवीन मंडी के संचालन के शुरुआती दौर में गुड़ की आवक प्रतिदिन 98 हजार मन थी लेकिन घटते-घटते यह चार से पांच हजार मन तक पहुंच गई।
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गुड़ कारोबार के लिए नवीन मंडी की स्थापना 1982 में की गई थी। उस समय मंडी में 200 से अधिक सक्रिय गुड़ व्यापारी थे। एक आकलन के अनुसार नवीन मंडी स्थापना के समय जनपद के 30 प्रतिशत गन्ने से गुड़ बनाया जाता था जो बिकने के लिए सीधे गुड़ मंडी आता था।
उस समय शामली सहित जनपद में केवल चार चीनी मिल थी। लेकिन कालांतर में चीनी मिलों की संख्या बढने और क्रेशर के खत्म होने के साथ ही मंडी में गुड़ की आवक घटती चली गई। जिसको लेकर गुड़ मंडी के व्यापारी आक्रोशित हैं। बुधवार को दी गुड खंडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन से जुड़े मंडी के व्यापारियों ने घट रही आवक पर हंगामा किया था।
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गुड़ माफिया पर लगाया जाए अंकुश : संजय मित्तल
दी गुड खंडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन अध्यक्ष संजय मित्तल का कहना है कि जनपद में गुड़ माफिया हावी है, जिन पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा। मंडी के बाहर बैठे व्यापारियों को भी लाइसेंस दिए गए हैं। मंडी में बैठे व्यापारियों ने महंगी दुकानें लेकर कारोबार किया था। गुड़ की आवक न होने के कारण उनके सामने दिक्कत खड़ी हो गई है। कभी मंडी में 200 से अधिक व्यापारी होते थे। आज उनकी संख्या दर्जनों में रह गई है। हालात ऐसे रहे तो आंदोलन किया जाएगा।


कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम अप्रसांगिक : अरुण खंडेलवाल

दी गुड़ खंडसारी एंड ग्रेन मर्चेंट एसोसिएशन के सदस्य अरुण खंडेलवाल का कहना है कि गुड़ माफिया पर अंकुश नहीं लगाया जा रहा। कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम अप्रसांगिक हो चुका है। प्रशासन को चाहिए कि सारे हालात की समीक्षा कर आमूलचूल परिवर्तन करे। गुड़ का अनुचित व्यापार व्यवहार बंद कराया जाए। मंडी के बाहर बैठे व्यापारियों को लाइसेंस देकर मंडी के औचित्य पर प्रश्नचिह्न लग रहा है। मंडी समिति सचल दल गठित कर गुड़ का अनुचित व्यापार करने वालों पर कार्रवाई करे।
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