मोटा अनाज का क्षेत्रफल मात्र दो हजार हेक्टेयर
मुजफ्फरनगर। जिले में दो लाख हेक्टेयर भूमि पर खेती होती है। 85 प्रतिशत भूमि पर यहां गन्ने का उत्पादन होता है। मोटा अनाज मात्र दो हजार हेक्टेयर में होता है। मोटा अनाज में ज्वार, बाजरा और चना यहां शून्य की स्थिति में है। केवल मक्का का उत्पादन कुछ किसान अपने घरेलू प्रयोग के लिए कर लेते हैं।
मोटा अनाज के घटते क्षेत्रफल को लेकर भारत सरकार चिंतित है, इसी को लेकर 2023 को मोटा अनाज वर्ष घोषित किया है। जिले में ज्वार, बाजरा और चने की खेती का क्षेत्रफल शून्य की स्थिति में है। यहां केवल दो हजार हेक्टेयर में मक्का की खेती होती है, जो किसान अपने घरेलू प्रयोग के लिए करते है। जिला कृषि अधिकारी जसवीर सिंह तेवतिया ने बताया कि हमारे जिले में दो दशक से मोटा अनाज की खेती शून्य पर पहुंच रही है। जो थोडी बहुत करता है वह अपने घरेलू प्रयोग के लिए करता है। मक्का दो हजार हेक्टेयर में होती है। हमारे जिले में मोटा अनाज का बीज भी किसानों के लिए नहीं आता है। अन्य फसलों के बीज सब्सिडी पर किसानों को दिए जाते हैं। मोटा अनाज के लिए यह व्यवस्था नहीं है। जिले में अभी आर्गेनिक खेती की स्थिति भी शून्य सी है। एक-दो किसान ही इसका प्रयास कर रहा है।
जंगली जानवर पहुंचाते हैं नुकसान
जसोई के किसान विजयपाल का कहना है कि जंगली जानवर नुकसान पहुंचाते हैं। इस वजह से मोटे अनाज की खेती करना मुश्किल हो गया है। पक्षियों से भी नुकसान है। य ही वजह है कि किसानों का इस खेती से मोह भंग हुआ है।
गन्ने की खेती में नुकसान कम
कसौली गांव के नीरज कुमार का कहना है कि गन्ने की खेती में जंगली जानवर इतना नुकसान नहीं कर पाते हैं। जिससे किसानों के लिए यह लाभदायक है। इसी वजह से मोटे अनाज की खेती से मोह भंग हो गया था।