तीन तलाक को लेकर पत्रकारों से वार्ता करते विभिन्न संगठन के पदाधिकारी।
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मुजफ्फरनगर। सुप्रीम कोर्ट की अधिवक्ता और मुस्लिम महिलाओं की लडाई लड़ रही फरहा फैज ने कहा कि मुल्ला-मौलवी तलाक के गलत मायने निकाल कर मुस्लिम महिलाओं का शोषण कर रहे हैं। आज के दौर में मौलवियों ने तीन तलाक के अपने स्तर से मायने निकाले है, जिसकी दीन ए इस्लाम में कहीं भी गुंजाइश नहीं है।
एक होटल में प्रेसवार्ता के दौरान फरहा फैज ने कहा कि देवबंद और नदवा के मदरसों में जो पढ़ाया जाता है, उसमें लिखा है कि यदि पति दीवार पर लिख दे और पत्नी पढ़ ले तो भी तलाक माना जाता है। पति हंसी मजाक में भी कह दे तो तलाक माना जाए। मैने कुरआन को कई बार पढ़ा उसमें ऐसा कहीं नहीं लिखा है। मौलाना दोबारा निकाह से पहले हलाला की जो बात करते है, यह महिलाओं का शारीरिक शोषण है। मौलाना और मौलवी कुरआन से हटकर बात करते हैं। तलाक के लिए एक प्रक्रिया, उसमें दो लोग गवाह होने चाहिए। पति-पत्नि को तीन माह का समय मिलना चाहिए। तलाक के बाद भी महिला घर से तत्काल नहीं निकाली जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तलाक पीड़िताओं को पेंशन की घोषणा कर दी है। लीगल एडवाईज भी मुफ्त दिया जाएगा। पत्रकार वार्ता में शुक्रताल से आई राज नंदेश्वरी ने कहा कि भारत में महिलाओं की पूजा का चलन है। किसी भी धर्म में महिलाओं का उत्पीड़न नहीं होना चाहिए। तीन तलाक के नाम पर महिलाओं का शोषण होता है। मौके पर राष्ट्रीय हिंदू शक्ति संगठन संजय अरोरा, सरिता अरोरा, ओंकार सिंह, सत्यप्रकाश, योगीराज प्रकाशचंद, पुष्पेंद्र, धीरज त्यागी, हीना, शिवपाल आदि रहे।