मोरना गांव तेवड़ा में हुए तब्लीगी इज्तमा में उलमा ने कहा कि दीन और नमाज का सीखना प्रत्येक मुसलमान का फर्ज है। उन्होंने कहा कि मुसलमान अपने बच्चों को दीन की राह पर चलने की शिक्षा दें। उलमा ने कहा कि रसूल-ए-पाक के बताए रास्तों पर चलकर तरक्की और शोहरत संभव है।
हालांकि आज हम (मुसलमान) राह से भटक रहे हैं, जिसके चलते तमाम मामलात (मसले) बिगड़ रहे हैं। दिल्ली से आए मौलाना जमशेद ने मुल्क में अमन-चैन के लिए दुआएं कराई। इस दौरान जिले भर के ग्रामों से आए अकीदतमंदों ने विश्व शांति के लिए दुआएं की।
तब्लीगी इज्तमे में दिल्ली से आए मौलाना जमशेद ने खिताब फरमाया कि प्रत्येक मुसलमान को नमाज कायम के साथ दीन सीखना चाहिए। रसूल-ए-पाक के बताए रास्तों पर चलकर मानव सेवा के कार्य, सद्भाव अपनाना चाहिए। मुसलमान दूसरों की बुराइयों को नजरअंदाज कर अपने नेक कामों पर ध्यान लगाए। गलतियों को माफ कर देना मुसलमान की पहचान है।
नमाज और मानव सेवा दीन की कुंजी है। उलमा ने फरमाया कि घर का माहौल भी दीनी बनाएं और बच्चों के साथ औरतों को भी दीन के प्रत्येक चीज समझाएं। उलमा ने दीन के साथ बच्चों को दुनियावी तालीम दिलाने पर भी जोर दिया। मुसलमानों को फिजूल खर्च से बचने की हिदायत दी गई।
इसके बाद मौलाना जमशेद ने मुल्क में चैन-अमन के लिए दुआएं कराई। इस दौरान जिले भर के ग्रामों से आए अकीकतमंदों ने विश्व शांति के लिए दुआएं की। तब्लीगी इज्तमे में दुआ के बाद अनेक क्षेत्रों के लिए दर्जनों जमात निकाली गई, जो कि अपने-अपने क्षेत्र में पहुंचकर दीन के लिए लोगों को जागरूक करेगी।
व्यवस्था बनाने में लगे युवा
मोरना। इज्तमा में आने वाले अकीदतमंदों की सेवा और रास्तों पर जाम की समस्या से निपटने के लिए युवा खुद लगे रहे। तीन दिनों तक तेवड़ा मार्ग पर काफी भीड़-भाड़ रही। इससे व्यवस्था बिगड़ गई, जिसे दुरुस्त करने के लिए युवाओं ने कमान संभाली।
दुआ में जाने वाले और उसके बाद घरों को लौटने वाले लोगों के लिए विशेष तैयारियां रखी गई। तब्लीगी इज्तमे में दूरदराज के साथ आसपास के करीब 50 से ज्यादा युवक-युवतियों का सामूहिक निकाह कराया गया, जिसमें दिल्ली से आए उलमा ने निकाह पढ़ाए।