वीतराग स्वामी कल्याणदेव ने चिट्ठियों के सहारे पूरे देश में जनसंपर्क का नेटवर्क बनाया था। न ही आज जैसे संचार साधन थे और न सुविधाएं। संत की चिट्ठियां जरूरत मंदों के लिए रामबाण सिद्ध होती थी। शुक्रताल के संग्रहालय में मौजूद चिट्ठियां और पत्रों में शिक्षा ऋषि का विराट पुरुषार्थ और महान व्यक्तित्व झलकता है।
स्वामी कल्याणदेव ऐसे विरल संत थे, जो त्याग तपस्या से जन मानस की सेवा में लीन रहे। शिक्षा, स्वास्थ्य और तीर्थों के विकास से जुड़े कार्यों को पूरा करने के लिए उन्होंने चिट्ठियों को संपर्क की शक्ति बनाया। देश के बड़े राजनीतिज्ञों, उद्योगपतियों और ब्यूरोक्रेसी को अपने पत्रों से जोड़ा और फिर जनहित से जुड़ी संस्थाओं को स्थापित करने में मदद ली। श्री शुकदेव आश्रम में मौजूद दुर्लभ पत्रों में संत के जीवन की झांकी हैं।
श्री सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा पंजाब से वर्ष 1948 में आए पत्र में उन्हें लाहौर आमंत्रित किया गया। दस नवंबर 1940 तथा 18 जुलाई 1941 को लखनऊ से आईसीएस पीडब्ल्यू मार्श ने विभिन्न समस्याओं एवं सूखे के संकट पर स्वामी को पत्रों का जवाब भेजा था।
मार्श पहले मुजफ्फरनगर के डीएम और फिर मेरठ मंडल के कमिश्नर रहे। आईसीएस क्यू हेंस ने 19 दिसंबर 1927 को उन्हें कैंप सहारनपुर के बंगले पर आमंत्रित किया था। तीन मार्च 1940 को लखनऊ से डीजीपी ने लाहौर के आईजी जेटीएन बैकेट को जो पत्र लिखा, उसमें कहा गया कि शिक्षा एवं सेवा में जुटे स्वामी की पंजाब भ्रमण के दौरान मदद की जाए।
20 मार्च 1946 को वन विभाग के सुपरिटेंडेंट आफ दून, एम जॉनसन ने लखनऊ के चीफ कंजर्वेटर ऑफ फोरेस्ट को शुक्रताल जीर्णोद्धार के लिए इमारती लकड़ियां मुहैया कराने की स्थिति से अवगत कराया है। चार सितंबर, 1945 को काशी हिंदू विश्वविद्यालय से पंडित मदन मोहन मालवीय ने पत्र लिखा, जिसमें स्वामी कल्याणदेव से भागवत के विद्वान वैदिकों द्वारा यज्ञ संपादित कराने का आग्रह किया गया है।
यूनाइटेड प्रोविंसेस के पुलिस और ट्रांसपोर्ट मंत्री रहते लाल बहादुर शास्त्री ने 20 अप्रैल, 1948 को उन्हें लेटर भेजा, जिसमें पचेंडा कलां गांव में यज्ञ में शामिल होने का जिक्र किया है। पूर्व पीएम चौधरी चरण सिंह, पूर्व सीएम कमलापति त्रिपाठी, पूर्व राज्यपाल वीरेंद्र वर्मा, पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री बलराम जाखड़, आदि के पत्रों में शिक्षा ऋषि के जीवन मूल्यों का अंश दिखता है।
गांधी पॉलिटेक्निक से हट गया डाक बॉक्स
मुजफ्फरनगर। गांधी पॉलिटेक्निक में स्वामी कल्यश्देव की कुटिया के पास केंद्रीय संचार विभाग के मंत्री पीए शंकर नारायणन के निर्देश पर डाक विभाग ने चिट्ठी संग्रह का बॉक्स लगा दिया था, ताकि शिक्षा ऋषि को चिट्ठी पोस्ट करने में सुलभता रहे। हालांकि उनके ब्रह्मलीन होने के बाद यह बॉक्स अब हटा दिया गया है। गांधी पॉलिटेक्निक के पूर्व प्राचार्य रामपाल सिंह बताते हैं कि शिक्षा ऋषि के पास पत्रों से संवाद जोड़ने की अद्भुत कला थी।
शिक्षा ऋषि का श्रद्धांजलि समारोह आज, जुटेंगे श्रद्धालु
मोरना। शुकतीर्थ के जीर्णोद्धारक, शिक्षा ऋषि वीतराग स्वामी कल्याण देव महाराज की 14वीं पुण्यतिथि शनिवार को भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम शुक्रताल में श्रद्धा और भक्ति से मनाई जाएगी। समाधि मंदिर में प्रात: सात बजे चरणाभिषेक के बाद यज्ञ होगा।
साढ़े दस बजे डोंगरे भागवत भवन में आयोजित श्रद्धांजलि समारोह में केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ सत्यपाल सिंह मुख्य अतिथि रहेंगे। विशिष्ठ अतिथि के रुप में प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण एवं संस्कृति मंत्री चौधरी लक्ष्मी नारायण भाग लेंगे। बिजनौर सांसद कुंवर भारतेंद्र सिंह और मीरापुर विधायक अवतार सिंह भड़ाना सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि, शिक्षाविद्, समाजसेवी शिक्षा ऋषि को श्रद्धा सुमन अर्पित करेंगे।
वृक्षों के बिना जीवन नहीं सुरक्षित : ओमानंद
वन विभाग के निर्देशन में भागवत पीठ श्री शुकदेव आश्रम के मुख्य द्वार पर आठ हजार पेड़ वितरित करने के अभियान का शुभारंभ पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद सरस्वती ने किया। उन्होंने कहा कि वृक्षों के बिना मानव जीवन सुरक्षित नहीं है। जंगल, जल और जीव की रक्षा का संकल्प करें।
शुक्रताल में पौधरोपण के लिए फलदार, छायादार और औषधीय चार हजार पौधों का वितरित किया गया। मुख्य अतिथि स्वामी ओमानंद सरस्वती ने श्रद्धालुओं, भागवत भक्तों और क्षेत्रीय ग्रामीणों को पौधे भेंट किए। संत ने कहा कि पेड़-पौधों के बिना जीवन की कल्पना नहीं की जा सकती।
प्राकृतिक संतुलन और जीवन रक्षा के लिए पेड़ लगाए। यूकेलिप्टिस, अमरूद, नीम, ऑवला, सोगान, मोलश्री आदि के पेड़ बांटे गए। रेंजन राज सिंह पुंडीर ने बताया कि शुक्रताल क्षेत्र में आठ हजार पौधों का रोपण किया जाएगा। स्वामी भजनानंद, प्रधान सुशील शर्मा, ब्रह्मचारी रामफल, आचार्य इंद्रपाल, अमित राठी, प्रेमशंकर मिश्रा, मैनपाल, नवीन चौधरी, साजिद, ब्रह्मपाल सिंह, विमल गुप्ता, वन दरोगा शबी हैदर, धनीराम, सतेंद्र आदि मौजूद रहे।